शिक्षा की मानव जीवन में उपादेयता

TSM मासिक प्रतियोगिता : ०३
विषय : शिक्षा की आवश्यकता

(गीता जयंती विशेष)

योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अत्यन्त विषम परिस्थिति में गीता का ज्ञान दिया था! धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में जब सहस्त्रों मृतोत्सुक आत्मायें सैनिकों का स्वरूप धारण कर अपने परिजनों का हीं लहू पीने के लिए व्याकुल हो रही थीं, तब ऐसा विकट दृश्य देखकर अर्जुन मोहवश लोक परलोक पर विचार करते हुये भयभीत हो जाते हैं।
इतना हीं नहीं उन्होंने अपने कन्धे से गाण्डीव धनुष पौरुष को उतार कर युद्ध न करने का निर्णय ले लिया।

तब भगवान ने पूछा, “क्या हुआ पार्थ?”
अर्जुन ने कहा, “मैं युद्ध नहीं करूँगा केशव!”

युद्ध न करने के पक्ष में उन्होंने अनेकों तर्क प्रस्तुत किये।
तब श्रीकृष्ण ने विचार किया, यह अज्ञानता अर्जुन को युद्ध से विरत कर देगा। तब तो न केवल पाण्डवों (समाज)का पराभव होगा, अपितु मानवता के लिए अज्ञानता बहुत बड़ा संकट खड़ा कर देगा। जिससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ सकता है। अतः मानव धर्म की रक्षा के लिए भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का अद्भुत ज्ञान दिया।

इसी को “श्रीमद्भगवद्गीता” कहते हैं। यह एक सर्वोच्च और सार्वभौमिक ग्रन्थ है। गीता समता और सद्भाव का अलौकिक ज्ञान प्रस्तुत करती है।

अब विचारणीय विषय यह है कि भगवान श्रीकृष्ण जब अर्जुन को गीतोपदेश प्रदान कर महाभारत के युद्ध के लिए कृतनिश्चय कर हीं चुके, फिर शिक्षा में इसके प्रचार और प्रसार का क्या औचित्य है?

तो मित्रों द्वापरयुग में सिर्फ एक अर्जुन और वह भी केवल एक बार मोहवश विषाद को प्राप्त हुए थे, परन्तु वर्तमान युग में हम सभी मानव हर बार उचित अनुचित के विषमताओं में फँस कर अपने कर्म के प्रति उदासीन हो जाते हैं।

अतः हम सभी के लिए गीता रूपी शिक्षा की आवश्यकता है।

परन्तु विडम्बना देखिए कि ऐसे महान ग्रन्थ को जो अमरता का प्रतिनिधित्व करता है उसे हम अशिक्षित मनुष्यों ने मृत्यु की प्रतिनिधि पुस्तिका के रूप में प्रचारित कर रखा है। आज तकरीबन सभी परिवारों में देखा जाये तो किसी के निधनोपरान्त शव के समीप एक पंडितजी कुछ अगरबत्तियाँ जलाये गीता पाठ गुनगुना रहे होते हैं।

जबकि विचार करें तो गीता केवल और केवल जीवनमुक्त हीं करती है। इसकी विषयवस्तु कर्म पर आधारित है इसलिए मानव मात्र जीवित रहते हुये हीं इसका अनुसंधान करे तो मोक्ष सुनिश्चित है।
लेकिन अशिक्षा के कारण यह हम करते नहीं और मरने के बाद मृतात्मा के चित्र पर

“वासाँसि जीर्णानि यथा विहाय……..…..।। और नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि…….……।।
जैसे श्लोक अवश्य अँकित करते हैं। यही अज्ञान है कि जो श्लोक विशुद्धत: आत्मतत्व का प्रतिपादन करते हैं उन्हीं को कुछ मृत्यु का सूचनापट्ट बना दिया जाता है।

हमारे विचार से यह भी एक प्रकार की अशिक्षा ही है।
किसी भी विषय को समझने के लिए आपको अध्ययन करना हीं होगा।

प्रसंगवश मैं यह भी स्पष्ट करना चाह रहा हूँ, शिक्षा का मतलब शिक्षित होने से है ना की साक्षर अथवा निपुण, जैसे सर्कस के जानवर निपुण तो होते हैं मगर शिक्षित नहीं होते। क्यूंकि उन्हें ये पता तो अवश्य होता है की कैसे करना है मगर यह क्यूँ करना है वे नहीं जानते। यहाँ बहेलिए और कबूतर की कथा सरल और सटीक उदाहरण है।

धन्यवाद !

अश्विनी राय ‘अरूण’

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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