स्वामी सहजानंद सरस्वती

महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ असहयोग आंदोलन बिहार में जिस समय गति पकड़ रहा था, उसी समय एक युवा सन्यासी पूरे बिहार में घूम-घूमकर अंग्रेजी राज के खिलाफ लोगों को खड़ा कर रहा था। यह वह समय था जब युवा सन्यासी भारत को समझने की कोशिश कर रहा था। भारत को समझने के क्रम में सन्यासी को एक अनुभव हुआ। उसने देखा की किसानों की हालत गुलामों से भी बुरी है। संन्यासी का मन संघर्ष की ओर उन्मुख होने लगा। वो किसानों को लामबंद करने की मुहिम में जुट गया।

कालांतर में किसानों का यही लामबंद किसान आंदोलन का रूप ले लिया। भारत के इतिहास में संगठित किसान आंदोलन खड़ा करने और उसका सफल नेतृत्व करने का एक मात्र श्रेय इसी युवा सन्यासी को जाता है, जिन्हें हम स्वामी सहजानंद सरस्वती के नाम से जानते हैं।

कांग्रेस पार्टी में रहते हुए स्वामीजी ने किसानों को जमींदारों के शोषण से मुक्त कराने का अभियान जारी रखा। उनकी बढ़ती लोकप्रियता एवं सक्रियता से परेशान हो अंग्रेजों ने उन्हें जेल में डाल दिया। कारावास में रहते हुए स्वामीजी ने कांग्रेस के नेताओं को मिलने वाली सुविधाओ को देखा और बड़े हैरान हुए। विद्रोही स्वामीजी का कांग्रेस से मोहभंग हो गया और यहीं से सहजानंद ने किसानों को हक दिलाने वाले संघर्ष को ही अपने जीवन का लक्ष्य मान लिया।

स्वामीजी का जन्म २२ फरवरी, १८८९ को महाशिवरात्रि के दिन उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले के देवाग्राम में हुआ था। स्वामीजी अभी तीन साल के भी नहीं थे, तभी उनकी माता का देहान्त हो गया। उनकी शिक्षा जलालाबाद मदरसा से शुरू हुई।

उनकी बैरागी प्रवृति को देखकर १९०५ में उनका विवाह करा दिया गया मगर ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। विवाह के एक साल के के भीतर ही पत्नी का भी स्वर्गवास हो गया। कुछ वर्षों के बाद घर में उनके विवाह की चर्चा होने लगी, यह जान वे महाशिवरात्रि को घर से निकल काशी में दसनामी संन्यासी स्वामी अच्युतानन्द जी के यहाँ पहुंच प्रथम दीक्षा प्राप्त कर संन्यासी बन गए। उसके बाद शरू हुई गुरु की खोज। जिसमें वे पूरे एक वर्ष तक भारत के तीर्थों का भ्रमण करते रहे। अंततः पुन: काशी पहुँचकर दशाश्वमेधा घाट स्थित श्री दण्डी स्वामी अद्वैतानन्द सरस्वती से दीक्षा ग्रहण कर दण्ड प्राप्त किया और दण्डी स्वामी सहजानन्द सरस्वती कहलाए।

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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