इरोम चानू शर्मिला

२ नवम्बर, २००० के दिन मणिपुर की राजधानी इंफाल के मालोम में असम राइफल्स के जवानों के हाथों १० बेगुनाह लोग मारे गए थे। इसके विरोध में इरोम ने ४ नवम्बर, २००० को अनशन शुरू किया, उन्हें यह उम्मीद थी कि १९५८ से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा के साथ १९९० से जम्मू-कश्मीर में लागू आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट को हटवाने में वह महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चल कर कामयाब होंगी।

अब आप सोच रहे होंगे की ये इरोम कौन है और यह मामला क्या है, तो आईए हम इरोम के साथ ही साथ इस पूरे मामले को संक्षेप में चर्चा करते हैं…

इरोम यानी इरोम चानू शर्मिला का जन्म १४ मार्च, १९७२ को कोंगपाल, इम्फाल, मणिपुर के रहने वाले पिता इरोम नंदा और माता इरोम ओंग्बी सखी के यहाँ हुआ था।

पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न हिस्सों आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट यानी एएफएसपीए कानून के तहत सुरक्षा बलों को किसी को भी देखते ही गोली मारने या बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है। शर्मिला इसके खिलाफ इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल करने लगीं, यह हड़ताल लगभग १६ वर्षों तक यानी ४ नवम्बर, २००० से ९ अगस्त २०१६ तक चला। मगर भूख हड़ताल के दौरान सरकार ने शर्मिला को आत्महत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया। मगर यह गिरफ्तारी एक साल से अधिक नहीं हो सकती थी अतः हर साल उन्हें रिहा करते ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाता था और नाक से लगी एक नली के जरिए उन्हें खाना दिया जाता था तथा इस के लिए पोरोपट के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को उनके लिए अस्थायी जेल बना दिया गया था। हड़ताल के अंतिम सालों में यानी जस्ट पीस फाउंडेशन ट्रस्ट के जरिए शर्मिला को आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने मणिपुर की लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी के टिकट पर २०१४ के लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया मगर शर्मिला ने इसे अस्वीकार कर दिया।

बात जुलाई २०१६ की है जब अचानक ही शर्मिला ने घोषणा की कि वे शीघ्र ही अपना अनशन समाप्त कर देंगी। जब उनसे मीडिया ने कारण जानना चाहा तो उन्होंने अपने इस निर्णय का कारण आम जनता की संघर्ष के प्रति बेरुखी को बताया। ९ अगस्त, २०१६ का वो ऐतिहासिक दिन जब इरोम शर्मिला ने अदालत से निकलकर अपना अनशन खत्म करने का ऐलान किया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें शहद की एक शीशी दी। इरोम ने शीशी से थोड़ा सा शहद अपनी हथेली पर रखा और उसे देखकर वह भावुक हो गईं। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “मैं क्रांति की प्रतीक हूं। मैं मणिपुर की मुख्यमंत्री बनना चाहती हूं, ताकि अपने मुद्दों को राजनीति के जरिये उठा सकूं।” इरोम ने आगे कहा, “मुझे आज़ाद किया जाए। मुझे अजीब सी महिला की तरह देखा जा रहा है। लोग कहते हैं, राजनीति गंदी होती है, मगर समाज भी तो गंदा है। उन्होंने कहा, मैं सरकार के ख़िलाफ़ चुनाव में खड़ी होऊंगी। मैं सबसे कटी हुई थी। मैंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर अमल किया है। अब मुझे आज़ाद होना होगा। लोग मुझे इंसान के तौर पर क्यों नहीं देख सकते ? मैं अपील करती हूं कि मुझे आज़ाद किया जाए…

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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