गणेश दामोदर सावरकर

गणेश दामोदर सावरकर उर्फ बाबाराव सावरकर का जन्म १३ जून, १८७९ को महाराष्ट्र राज्य के नासिक नगर के निकट भागपुर नामक स्थान के दामोदर विनायक सावरकर एवं राधाबाई दामोदर सावरकर के यहाँ हुआ था। वे अपने माता पिता की पहली संतान थे, यानी भाई बहनों में सबसे बड़े, उनके बाद दूसरे स्थान पर विनायक दामोदर सावरकर थे जिन्हें इतिहास वीर सावरकर के नाम से जानता है और फिर तीसरे स्थान पर उनकी बहन मैनाबाई थी। इन सभी के बाद नारायण दामोदर सावरकर सबसे छोटे थे। नासिक में ही उनकी शिक्षा हुई। आरंभ में उनकी रुचि धर्म, योग, जप, तप आदि विषयों की ओर ज्यादा थी। माता-पिता की जल्द मृत्यु हो जाने के बाद बीस वर्ष की आयु में ही परिवार की जिम्मेदारी युवक गणेश के कंधे पर आ गई थी।

वर्ष १८९७ में प्लेग आफीसर रेंड के अत्याचारों से क्रुद्ध होकर चापेकर बंधुओं ने उसकी हत्या कर दी, जिससे पूरे महाराष्ट्र में हलचल मच गई। मगर गणेश पर (जो बाबा सावरकर कहलाते थे) इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। एक बार तो वे सन्न्यास लेने की सोचने लगे थे पर प्लेग में पिता की मृत्यु हो जाने के कारण और छोटे भाई बहनों की शिक्षा-दीक्षा, पालन पोषण आदि का दायित्व आ जाने से उनकी यह इच्छा पूरी ना हो सकी। एक तो कम आयु ऊपर से परिवार की पूरी जिम्मेदारी फिर भी उन्होंने भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन का नेतृत्व करना शुरू कर दिया। सही मायनो में गर कहा जाए तो वीर सावरकर, उन्ही के पदचिन्हों पर चले थे। महाराष्ट्र में उस समय ‘अभिनव भारत’ नामक क्रांतिकारी दल काम कर रहा था। विनायक सावरकर भी इस दल से संबद्ध थे। विनायक जब इंग्लैण्ड चले गए तो उनका काम भी बाबा सावरकर ने अपने हाथों में ले लिया। वे विनायक की देशभक्ति रचनाओं के साथ उनकी इंगलैण्ड से भेजी अन्य सामग्री को यहाँ भारत में मुद्रित कराते, उसका वितरण करते और साथ ही ‘अभिनव भारत’ के लिए धन भी एकत्र करते। ऐसा कार्य जो सरकार की दृष्टि से गैरकानूनी हो ओझल कैसे रह सकता था। वर्ष १९०९ में वे गिरफ्तार कर लिए गए। उनपर देशद्रोह का मुक़दमा चला और आजीवन कारावास की सज़ा देकर अंडमान भेज दिए गए। वर्ष १९२१ में उन्हें वहाँ से भारत लाय़ा गया और एक वर्ष तक के लिए साबरमती जेल में बंद कर दिया गया। जहाँ से वे १९२२ में रिहा हुए और डॉ. हेडगेवार के संपर्क में आए।

एम.जे.अकबर लिखते हैं कि “आरएसएस शुरू करने वाले पांच दोस्त डॉ.बी.एस.मूनजे, डॉ.एल.वी.परांजपे, डॉ.थोलकर, डॉ.हेडगेवार और बाबाराव सावरकर स्वयं थे”।

रिति कोहली ने लिखा है कि गणेश सावरकर का राष्ट्रवाद पर निबंध “राष्ट्र मीमांसा” को वर्ष १९३८ में गोलवलकर ने “हम, और हमारा, राष्ट्रवाद” के नाम से दुबारा परिभाषित किया था। जिसे किन्ही कारणो से बाद में समाप्त कर दिया गया, जो सही मायने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा का पहला व्यवस्थित वक्तव्य था।

गणेश दामोदर सावरकर ने अनेको पुस्तको की रचना की है।  दुर्गानंद के छद्म नाम से उनकी पुस्तक ‘इंडिया एज़ ए नेशन’ को सरकार ने जब्त कर ली थी। वे हिन्दू राष्ट्र और हिन्दी के समर्थक थे।

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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