गिरिराज किशोर

‘सख्त से सख्त बात शिष्टाचार के आज घेरे में रहकर भी कही जा सकती है। हम लेखक हैं। शब्द ही हमारा जीवन है और हमारी शक्ति भी। उसको बढ़ा सकें तो बढ़ायें, कम न करें। भाषा बड़ी से बड़ी गलाजत ढंक लेती है।’

इतनी बड़ी बात को विनम्रता और सौजन्यता के साथ कहने वाले श्री गिरिराज किशोर का जन्म 8 जुलाई, 1937 को उत्तर प्रदेश के मुजफ़्फ़रनगर में हुआ था। अपनी शिक्षा के अंतर्गत उन्होंने ‘मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क’ की डिग्री 1960 में ‘समाज विज्ञान संस्थान’, आगरा से प्राप्त की थी। गिरिराज किशोर 1960 से 1964 तक उत्तर प्रदेश सरकार में सेवायोजन अधिकारी व प्रोबेशन अधिकारी भी रहे थे। 1964 से 1966 तक इलाहाबाद में रहकर स्वतन्त्र लेखन किया। फिर जुलाई, 1966 से 1975 तक ‘कानपुर विश्वविद्यालय’ में सहायक और उप-कुलसचिव के पद पर सेवारत रहे। आईआईटी कानपुर में 1975 से 1983 तक रजिस्ट्रार के पद पर रहे और वहाँ से कुलसचिव के पद से उन्होंने अवकाश ग्रहण किया। वर्ष 1983 से 1997 तक ‘रचनात्मक लेखन एवं प्रकाशन केन्द्र’ के अध्यक्ष रहे। गिरिराज किशोर साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की कार्यकारिणी के भी सदस्य रहे। रचनात्मक लेखन केन्द्र उनके द्वारा ही स्थापित किया गया था। आप हिन्दी सलाहकार समिति, रेलवे बोर्ड के सदस्य भी रहे। वर्ष 1998 से 1999 तक संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने गिरिराज किशोर को ‘एमेरिट्स फैलोशिप’ दी। 2002 में ‘छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा डी.लिट. की मानद् उपाधि दी गयी। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में मई, 1999-2001 तक फैलो रहे।

प्रतिभा सम्पन्न लेखक गिरिराज किशोर के सम-सामयिक विषयों पर विचारोत्तेजक निबंध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। ये बालकों के लिए भी लिखते रहे हैं। इस तरह गिरिराज किशोर एक बहुआयामी प्रतिभा सम्पन्न लेखक हैं। गिरिराज किशोर को सर्वाधिक कीर्ति औपन्यासिक लेखन के माध्यम से ही प्राप्त हुई। वर्तमान में गिरिराज जी स्वतंत्र लेखन तथा कानपुर से निकलने वाली हिन्दी त्रैमासिक पत्रिका ‘अकार’ त्रैमासिक के संपादन में संलग्न हैं।

प्रसिद्धि…

लेखक की शुरुआती दौर में लिखी गयी किसी मशहूर कृति की छाया से बाद की रचनायें निकल नहीं पातीं। गिरिराज जी का लेखन इसका अपवाद है और इनकी हर नयी रचना का क़द पिछली रचना से के क़द से ऊंचा होता गया। देश के इस प्रख्यात साहित्यकार को ‘कनपुरिये’ अपना ख़ास गौरव मानते हैं।

रचनाएँ…

प्रकाशित कृतियां –
उपन्यासों के अतिरिक्त दस कहानी संग्रह, सात नाटक, एक एकांकी संग्रह, चार निबंध संग्रह तथा महात्मा गांधी की जीवनी ‘पहला गिरमिटिया’ प्रकाशित हो चुका है।

कहानी संग्रह –
नीम के फूल,
चार मोती बेआब,
पेपरवेट,
रिश्ता और अन्य कहानियां,
शहर -दर -शहर,
हम प्यार कर लें,
जगत्तारनी एवं अन्य कहानियां,
वल्द रोज़ी,
यह देह किसकी है?
कहानियां पांच खण्डों में ‘मेरी राजनीतिक कहानियां’
‘हमारे मालिक सबके मालिक’

उपन्यास-
लोग (1966)
चिड़ियाघर (1968)
यात्राएँ (1917)
जुगलबन्दी (1973)
दो (1974)
इन्द्र सुनें (1978)
दावेदार (1979)
यथा प्रस्तावित (1982)
तीसरी सत्ता (1982)
परिशिष्ट (1984)
असलाह (1987)
अंर्तध्वंस (1990)
ढाई घर (1991)
यातनाघर (1997)
पहला गिरमिटिया (1999)
आठ लघु उपन्यास अष्टाचक्र के नाम से दो खण्डों में ।
पहला गिरमिटिया – गाँधी जी के दक्षिण अफ्रीकी अनुभव पर आधारित महाकाव्यात्मक उपन्यास।

नाटक –
नरमेध,
प्रजा ही रहने दो,
चेहरे – चेहरे किसके चेहरे,
केवल मेरा नाम लो,
जुर्म आयद,
काठ की तोप।

लघुनाटक- बच्चों के लिए एक लघुनाटक ‘ मोहन का दु:ख’

लेख/निबंध –
संवादसेतु,
लिखने का तर्क,
सरोकार,
कथ-अकथ,
समपर्णी,
एक जनभाषा की त्रासदी,
जन-जन सनसत्ता।

पुरस्कार और सम्मान…

गिरिराज किशोर का उपन्यास ‘ढाई घर’ अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। 1991 में प्रकाशित इस कृति को 1992 में ही ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ प्राप्त हुआ। महात्मा गांधी के अफ़्रीका प्रवास पर आधारित ‘पहला गिरमिटिया’ भी काफ़ी लोकप्रिय हुआ, पर ‘ढाई घर’ औपन्यासिक क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। राष्ट्रपति द्वारा 23 मार्च 2007 को ‘साहित्य और शिक्षा’ के लिए ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से विभूषित किया गया था। उत्तर प्रदेश के ‘भारतेन्दु पुरस्कार’ नाटक पर, ‘परिशिष्ट’ उपन्यास पर ‘मध्यप्रदेश साहित्य परिषद’ के ‘वीरसिंह देव पुरस्कार’, ‘उत्तर प्रदेश हिन्दी सम्मेलन’ के ‘वासुदेव सिंह स्वर्ण पदक’ तथा ‘ढाई घर’ उ.प्र.के लिये हिन्दी संस्थान के ‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार से सम्मानित किये गये। ‘भारतीय भाषा परिषद’ का ‘शतदल सम्मान’ मिला। ‘पहला गिरमिटिया’ उपन्यास पर ‘के.के. बिरला फाउण्डेशन’ द्वारा ‘व्यास सम्मान’ और जे. एन. यू. में आयोजित ‘सत्याग्रह शताब्दी विश्व सम्मेलन’ में सम्मानित किया गया।

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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