गुरबचन सिंह सलाारिया

मध्य अफ्रीका में एक देश है कांगो। इसकी सीमा गबोन, कैमरून, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य, काबिन्डा का अंगोलन बाह्य क्षेत्र और गिनी की खाड़ी से मिलती है। वर्ष १९६० में कांगो गणराज्य बेल्जियम से स्वतंत्र हुआ था।लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह के दौरान कांगो सेना में एक विद्रोह हुआ और काले और सफेद नागरिकों के बीच हिंसा भड़क उठी। बेल्जियम ने सैनिकों को देश के दो हिस्सों कातांगा और दक्षिण कासाई से पलायन करने के लिए सैनिकों को भेज दिया, बाद में बेल्जियम के समर्थन से अलग हो गए। कांगो सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से मदद मांगी। १४ जुलाई, १९६० को संगठन ने कांगो में संयुक्त राष्ट्र ऑपरेशन की स्थापना करके एक बड़े बहुराष्ट्रीय शांति बल और सहायता मिशन के रूप में जवाब दिया। मार्च-जून १९६१ के बीच ब्रिगेडियर केएएस राजा की कमान के तहत भारत ने लगभग ३,००० सैनिकों की ९९वीं इन्फैन्ट्री ब्रिगेड द्वारा संयुक्त राष्ट्र बल में योगदान किया।

कांगो सरकार और कातांगा के बीच सामंजस्य के प्रयासों के बाद २४ नवंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव १६९ को मंजूरी दे दी। संकल्प ने कातांगा की अलगाव की निंदा की और संघर्ष का तुरंत हल करने और शांति स्थापित करने के लिए बल के उपयोग को अधिकृत किया। जवाब में पृथकतावादियों ने संयुक्त राष्ट्र के दो वरिष्ठ अधिकारियों को बंधक बना लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया लेकिन एक गोरखा राइफल्स के मेजर अजीत सिंह जो उनके कार चालक के रूप में पकड़े गए थे, वीरगति को प्राप्त हो गए।

दिसंबर, 1961 में कांगो में संयुक्त राष्ट्र के ऑपरेशन के तहत कांगो गणराज्य में तैनात भारतीय सैनिकों में एक सैनिक का नाम था गुरबचन सिंह सालारिया। आज हम आपको श्री सलारिया से परिचित कराते हैं…

परिचय…

गुरबचन सिंह सलाारिया का जन्म २९ नवंबर, १९३५ को पंजाब के शकगरगढ़ ( आज पाकिस्तान में है ) के पास एक गांव जनवाल में हुआ था। वह मुंशी राम सैनी और धन देवी के पांच बच्चों में से दूसरे थे। उनके पिता को पहले ब्रिटिश भारतीय सेना में हॉसंस हॉर्स के डोगरा स्क्वाड्रन में शामिल किया गया था। अपने पिता और उनकी रेजिमेंट की कहानियों को सुनकर सेलेरिया को बहुत कम उम्र में सेना में शामिल होने की प्रेरणा मिली।

भारत के विभाजन के परिणामस्वरूप सलाारिया के परिवार वाले पंजाब के भारतीय भाग में चले गए और गुरदासपुर जिले के जंगल गांव में बस गए। सालरिया ने स्थानीय गांव के स्कूल में दाखिला लिया और बाद में वर्ष १९४६ में उन्हें बंगलोर में किंग जॉर्ज रॉयल मिलिट्री कॉलेज में भर्ती कराया गया। अगस्त, १९४७ में उन्हें जालंधर में केजीआरएमसी में स्थानांतरित कर दिया गया। केजीआरएमसी से बाहर जाने के बाद वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के संयुक्त सेवा विंग में शामिल हुए। वर्ष १९५६ में एनडीए से स्नातक होने पर उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी से ९ जून,१९५७ को अपना अध्ययन पूरा किया। सालिया को शुरू में ३ गोरखा राइफल्स की दूसरी बटालियन में नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में मार्च १९९५ में १ गोरखा राइफल्स की तीसरी बटालियन में स्थानांतरित कर दिया गया।

कांगो में…

५ दिसंबर को सलारिया की बटालियन को दो बख्तरबंद कारों पर सवार पृथकतावादी राज्य कातांगा के १५० सशस्त्र पृथकतावादियों द्वारा एलिज़ाबेविले हवाई अड्डे के मार्ग के अवरुद्धीकरण को हटाने का कार्य सौंपा गया। उनकी रॉकेट लांचर टीम ने कातांगा की बख्तरबंद कारों पर हमला किया और नष्ट कर दिया। इस अप्रत्याशित कदम ने सशस्त्र पृथकतावादियों को भ्रमित कर दिया, और सलारिया ने महसूस किया कि इससे पहले कि वे पुनर्गठित हो जाएं, उन पर हमला करना सबसे अच्छा होगा। हालांकि उनकी सेना की स्थिति अच्छी नहीं थी फिर भी उन्होंने पृथकतावादियों पर हमला करवा दिया और ४० लोगों को कुकरियों से हमले में मार गिराया। हमले के दौरान सलारिया को गले में दो बार गोली मार दी और वह वीर गति को प्राप्त हो गए। बाकी बचे पृथकतावादी अपने घायल और मरे हुए साथियों को छोड़ कर भाग खड़े हुए और इस प्रकार मार्ग अवरुद्धीकरण को साफ़ कर दिया गया। अपने कर्तव्य और साहस के लिए और युद्ध के दौरान अपनी सुरक्षा की उपेक्षा करते हुए कर्तव्य करने के कारण सलारिया को भारत सरकार द्वारा वर्ष १९६२ में मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

सम्मान…

अपने कर्तव्य और साहस के लिए और युद्ध के दौरान अपनी सुरक्षा की उपेक्षा करते हुए कर्तव्य करने के कारण सलारिया को भारत सरकार द्वारा वर्ष १९६२ में मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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