Warning: The magic method Visual_Form_Builder::__wakeup() must have public visibility in /home/shoot2pen.in/public_html/wp-content/plugins/visual-form-builder/visual-form-builder.php on line 68

Warning: The magic method Visual_Form_Builder_Form_Display::__wakeup() must have public visibility in /home/shoot2pen.in/public_html/wp-content/plugins/visual-form-builder/public/class-form-display.php on line 35
रमाबाई » shoot2pen

रमाबाई

आज हम बात करेंगे संविधान निर्माता भीमराव आम्बेडकर की पहली पत्नी रमाबाई आंबेडकर के बारे में, जो इतने बड़े नाम से जुड़ीं दिखाई तो पड़ती हैं मगर किस्मत ने उन्हें सिर्फ दुख देखने के लिए चुना था अतः उन्होंने उसे खुद में समेटे हुए ही २७ मई, १९३५ को मात्र ३७ वर्ष की अल्प आयु में ही इस संसार को छोड़ दिया।

रमाबाई का जन्म ०७ फरवरी, १८९८ को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिला अंतर्गत वणंद नामक गांव के एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम भिकु धुत्रे (वलंगकर) व माता जी का नाम रुक्मिणी था। रमाबाई के अलावा उनकी और २ बहनें व एक भाई शंकर था। रमाबाई से एक बहन बड़ी थी जो दापोली में रहती थी। रमाबाई के पिता भिकु दाभोल बंदरगाह पर मछलियों की ढुलाई करने वाले दैनिक मजदूर थे, जो मछलियों से भरी हुई टोपलिया बाजार तक पहुंचाते थे। उन्हें हृदय रोग था मगर परिवार को पालना भी उन्हीं की जिम्मेदारी थी। रमा जब छोटी थी तब ही उनकी माता का बिमारी से निधन हो गया था। माता के निधन के आघात से अभी छोटी बच्ची रमा सही ढंग से उबर भी नहीं पाई थी कि कुछ दिनों बाद उनके पिता भिकु का भी निधन हो गया। अपने दोनो छोटे भाई बहनों के साथ रमा बिल्कुल अकेली रह गई। मगर समय किसी के लिए नहीं रुकता और ना ही उसे किसी की परवाह होती है, वह अपने सामान्य गति से चलता रहता है अतः वो चलता रहा। रमा को भी सहारा मिला अपने चाचा वलंगकर एवम मामा गोविंदपुरकर का। वे इन बच्चों को लेकर बंबई चले गये और वहां के एक चाळ भायखला में रहने लगे। अब यहां हम थोड़ी देर के लिए रमा की कथा को विश्राम देते हैं।

भारतीय सेना की महू छावनी में सेवारत रामजी सकपाल सूबेदार के पद पर पहुंच सेवानिवृत हो गए तो वे पुरे परिवार के साथ बंबई चले आये। सूबेदार साहब के पुत्र की उम्र लगभग १५ वर्ष की रही होगी तो वधू की तलाश करने लगे। वहीं उन्हे रमाबाई का पता चला, वे रमा को देखने गये। रमा उन्हें पसंद आई और उन्होंने रमा के साथ अपने पुत्र भीमराव की शादी कराने का फैसला कर लिया। विवाह के लिए तारिख सुनिश्चित कि गई और अप्रैल १९०६ में रमाबाई का विवाह भीमराव आंबेडकर से सपन्न हो गया। विवाह के समय रमा की आयु महज ९ वर्ष एवं भीमराव की आयु १५ वर्ष थी और वे ५वी में पढ रहे थे। उन दिनों भारत में बाल-विवाह का प्रचलन था।

रमा ने अपने पति को पहली बार भिवा के रूप में देखा था, जो कुछ वर्षो बाद भीमराव के रूप में जाने जाने लगे एवम कालांतर में बाबा साहेब आंबेडकर के नाम से प्रतिष्ठित हो गए। मगर अनपढ़ गंवार रमा बस रमाबाई अंबेडकर ही बन पाई। उन्हें भीमराव अंबेडकर की सामाजिक क्रांति से कभी लगाव नहीं था। उन्होंने भीमराव को अपने जीतेजी धर्म परिवर्तन नहीं करने दिया। ३७ वर्ष की अल्प आयु में जब रमाबाई २७ मई, १९३५ को बाबा साहेब को अकेला छोड़ अनंत के सफर पर निकल गई तो १३ अक्टूबर, १९३५ को नासिक के निकट येवला में एक सम्मेलन के दौरान बाबा साहेब आम्बेडकर ने धर्म परिवर्तन करने की घोषणा यह करते हुए कर दी, “हालांकि मैं एक अछूत हिन्दू के रूप में पैदा हुआ हूँ, लेकिन मैं एक हिन्दू के रूप में हरगिज नहीं मरूँगा!” जिसका जवाब रमाबाई उन्हें मरने से पूर्व कई बार दे चुकीं थीं, “आप आज जो भी हैं उसकी इज्जत आप क्यों नहीं करते, आपको इसी ने इतना कुछ दिया है। अंधेरे की दौड़ कभी समाप्त नहीं होती, संभल जाएं।” मगर….

रमाबाई से भीमराव आम्बेडकर को एक ही पुत्र यशवंत आंबेडकर हैं और यही उनकी नाम को आगे ले जाने वाले वंश रेखा के वाहक भी हैं (उनके अन्य चार बच्चो की मृत्यू बचपन में ही हो गई थी)।

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

Similar Articles

Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Advertisment

Instagram

Most Popular

मणिकर्णिका घाट

काशी में गंगा तट पर अनेक सुंदर घाट बने हैं, ये सभी घाट किसी न किसी पौराणिक या धार्मिक कथा से संबंधित हैं। काशी...

पंचगंगा घाट

काशी की बसावट के लिहाज से शहर के उत्तरी छोर से गंगा की विपरीत धारा की ओर चलें तो आदिकेशव घाट व राजघाट के...

आदिकेशव घाट

काशी में गंगा तट पर अनेक सुंदर घाट बने हैं, ये सभी घाट किसी न किसी पौराणिक या धार्मिक कथा से संबंधित हैं। काशी...