लल्लू लाल

भागवत पुराण के दसवें अध्याय पर यानी भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित प्रेमसागर के रचैया लल्लू लाल जी को आज शायद ही कोई जानता होगा और अगर कोई जानता होगा तो निश्चय ही अध्येता होगा। लल्लू लाल जी से ज्यादा तो उनके द्वारा रचित पुस्तकों को लोग जानते हैं और उन्हीं पुस्तकों, ग्रंथों के द्वारा वे परिचय प्राप्त करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि डब्लू. होलिंग्स ने सन् १८४८ में प्रेमसागर का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया था।

परिचय…

लल्लू लाल जी का जन्म दिनांक अभी ज्ञात नहीं हो पाया है मगर विद्वानों के अनुसार वर्ष १७६३ ई. में उत्तरप्रदेश प्रांत के आगरा में हुआ था। आप यह जानकर हैरान होंगे कि वे हिन्दी गद्य के निर्माताओं में से एक थे। इन्हें ‘लालचंद’, ‘लल्लूजी’ या ‘लाल कवि’ के नाम से भी जाना जाता था। एक साहित्यकार के रूप में लल्लू लालजी किस पायदान पर थे, इसका मूल्यांकन हम नहीं कर सकते यह काम आलोचकों का है, लेकिन आप इतना जान लीजिए कि हिन्दी के विकास में उनका बहुत योगदान उल्लेखनीय है।

इनके पूर्वज गुजरात से आकर आगरा बसे थे। कहा जाता है कि लल्लू लाल आगरा शहर की ‘सुनार गली’ में ही कहीं रहते थे। मगर न जाने क्यों आगरा की ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ में भी उनका विवरण नहीं है। लल्लू लाल जी को आजीविका के लिए बहुत भटकना पड़ा। वे मुर्शिदाबाद, कोलकाता, जगन्नाथपुरी आदि स्थानों में गए, पर नियमित आजीविका की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई तो वे घूम-फिर कर फिर से कोलकाता आ गए।

अध्यापन कार्य…

लल्लू लालजी तैरना बहुत अच्छा जानते थे। कहते हैं कि एक दिन उन्होंने तैरते समय एक अंग्रेज़ को डूबने से बचाया था। इस पर उस अंग्रेज़ ने इनकी बड़ी सहायता की और इन्हें ‘फ़ोर्ट विलियम कॉलेज’ में हिन्दी पढ़ाने और हिन्दी गद्य ग्रंथों की रचना का काम मिल गया। उनका काम ब्रिटिश राज के कर्मचारियों के लिए पाठन सामग्री तैयार करना भी था।

रचनाएँ…

इनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रंथ इस प्रकार हैं-

१. सिंहासन बत्तीसी

२. बैताल पच्चीसी

३. शकुंतला

४. माधवानल

५. प्रेम सागर

६. ब्रज भाषा व्याकरण

आलोचकों के अनुसार व्याकरण ग्रंथ को छोड़कर कोई रचना इनकी मौलिक नहीं मानी जाती है। सभी ब्रजभाषा में प्रकाशित किसी न किसी पुस्तक के आधार पर लिखी गई थीं। फिर भी इन पुस्तकों ने हिन्दी गद्य के आरम्भिक काल में खड़ी बोली के प्रचार में योगदान दिया। ‘बिहारी सतसई’ की टीका भी इन्होंने ‘लाल चंद्रिका’ नाम से की थी।

प्रेमसागर…

वर्ष १८०४ से १८१० के बीच लिखी गई कृति ‘प्रेमसागर’ कृष्ण की लीलाओं व भागवत पुराण के दसवें अध्याय पर आधारित थी। डब्लू. होलिंग्स ने वर्ष १८४८में अंग्रेज़ी में ‘प्रेमसागर’ का अनुवाद किया। ४७वीं रेजीमेंट लखनऊ में कैप्टन हाँलिंग्स ने प्रस्तावना में लिखा था- “हिन्दी भाषा का ज्ञान हिन्दुस्तान(तत्कालीन भारत) में रहने वाले सभी सरकारी अफ़सरों के लिए ज़रूरी है, क्योंकि यह देश के ज़्यादातर हिस्से में बोली जाती है।” प्राइस ने ‘प्रेमसागर’ के कठिन शब्दों का हिन्दी-अंग्रेज़ी कोष तैयार किया था।

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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