मातादीन वाल्मीकि

अमर पुरोधा, क्रांति के जनक व प्रथम क्रांतिकारी भारतीय वीर सपूत मातादीन वाल्मीकि जी का जन्म २९ नवम्बर, १८२५ को एक अछूत समझी जाने वाली जाति में हुआ था। मातादीन वाल्मीकि वर्ष १८५७ में हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम सेनानियों में से थे। वे ब्रितानी ईस्ट इण्डिया कम्पनी की एक इकाई में कारतूस निर्माण का कार्य करने वाले एक मजदूर थे। वे उन शुरुआती क्रांतिकारियों में से एक हैं जिन्होंने १८५७ में आजादी का बीज बोया था।

घटना…

वैसे तो १८५७ की क्रांति की पटकथा ३१ मई को लिखी गई थी, लेकिन मार्च में ही यह विद्रोह छिड़ गया। दरअसल हुआ यह था कि बैरकपुर छावनी, कलकत्ता से मात्र १६ किलोमीटर की दूरी पर था। फैक्ट्री में कारतूस बनाने वाले मजदूर अछूत समझी जाने वाली जाति यानी हेला, भंगी, मेहतर आदि जाति के होते थे। एक दिन की बात है, वहां से एक मुसहर जाति का एक मजदूर छावनी आया। ये वही मातादिन थे, जिनको प्यास लगी थी, तब उन्होंने वहां से गुजर रहे मंगल पांडेय नाम के सैनिक से पानी मांगी। मंगल पांडे, ऊंची जाति के होने के कारण पानी पिलाने से इंकार कर दिया। एक तो पहले से ही मातादीन थकान और प्यास से बौखलाए हुए थे और उसपर से इंकार सुनकर उनको गुस्सा आ गया। गुस्से में उन्होंने जो कहा वह इतिहास बन गया, उन्होंने कहा, ’कैसा है तुम्हारा धर्म जो एक प्यासे को पानी पिलाने की इजाजत नहीं देता और गाय जिसे हमारा हिंदू समाज मां मानता है, और सूअर जिससे मुसलमान नफरत करते हैं, उसी के चमड़े से बने और चर्बी लगे कारतूस को मुंह से खोलते हैं।’ मंगल पांडेय को यह पता नहीं था। यह सुनकर वे चकित रह गए। इसके बाद उन्होंने मातादीन को पानी पिलाया और इस बात के बारे में बैरक के सभी लोगों को बताया। हिंदू तो हिंदू, इस बात को जानकर मुसलमान भी बौखला उठे। इसके बाद २४ अप्रैल, १८५७ को ब्रितानी सेना की तीसरी हल्की अश्वारोही सेना के ८५ सैनिकों ने जिसमे मंगल पांडे भी थे, ने चर्बीयुक्त कारतूस का प्रयोग करने से इंकार कर दिया। बात बेहद छोटी है, मगर इसकी गूंज बड़ी तेज थी। इसके बाद अंग्रेजी शासन व्यवस्था के विरुद्ध विद्रोह पैदा हो गया। शुरुवाती क्रांति की अलख जगाने वाले इन ८५ सैनिकों में हवलदार मातादीन अग्रणी थे। इसकी पुष्टि सर जी. डब्लू. फॉरेस्ट के द्वारा लिखे स्टेट पेपर्स और जेबी पामर की १८५७ के विद्रोह का आरंभ किताब से होती है। इतना ही नहीं, शहीद स्मारक पर लगे शिलापट पर भी हवलदार मातादीन का नाम पहले नंबर पर अंकित है। हालांकि नाम के आगे कुछ नहीं लिखा है। इन ८५ घुड़सवार सैनिकों को फांसी देने का भी कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।

साक्ष्य का आधार…

१. मगर कैप्टन राइट के एक पत्र के अनुसार, जिसने एक पत्र मेजर वोनटीन दमदम के नाम लिखा था। इस पत्र में मातादीन द्वारा गुप्त जानकारी सैनकों को देकर शासन के खिलाफ बातचीत का उल्लेख था। जिससे पता चलता है कि महान पुरोधा मातादीन को ८ अप्रेल, १८५७ को फाँसी दे दी गई थी, वह भी मंगल पांडे से पहले।

२. चर्बी वाले कारतूस के प्रयोग के इंकार के बाद इन ८५ सैनिकों को मेरठ के विक्टोरिया पार्क स्थित जेल में कैद किया गया था। और दस मई की शाम इनके सैनिक साथियों ने शाम को जेल से मुक्त करा लिया था। इतिहास कहता है कि इसके उपरांत वे सब दीन! दीन! चिल्लाते हुए दिल्ली के लिये कूच कर गए थे (उनके इस तरह चिल्लाने का कारण क्या था?)। ११ मई, १८५७ को वे सब दिल्ली पहुंचकर अंतिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर को अनुरोध करके, उन्हें बादशाह घोषित कर दिया और फिर लाल किले पर इन सैनिकों ने झंडा फहरा दिया। इसके बाद वे सभी ८५ सैनिक कहां गये या इनकी क्या गतिविधियां रहीं? इस संदर्भ में अभिलेख बिल्कुल मौन है।

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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