फकीर मोहन सेनापति

आज हम बात करने वाले हैं उड़िया साहित्य के पितामह फकीर मोहन सेनापति के बारे में, जिनका जन्म १३ जनवरी, १८४३ (कहीं कहीं १४ जनवरी, १८४७) को उड़ीसा के तट पर ‘बालेश्वर नगर’ में हुआ था। उनके जन्म के दिन मकर संक्रान्ति का दिन था, इसीलिए शायद १३ और १४ तारीख को लेकर जानकारों के मध्य मतभेद है। इसके अलावा एक विचित्र संयोग की बात है कि इनका जब देहान्त हुआ था, उस दिन की तारीख १४ जून, १९१८ थी, यानी रज–संक्रान्ति का दिन।इनका आविर्भाव हुआ था संक्रान्ति में और तिरोभाव भी संक्रान्ति में। इसी कारण उड़िया साहित्य-जगत् में फकीर मोहन ‘संक्रान्ति-पुरुष’ के रूप में चर्चित हुए। इस संक्रान्ति के कारण ही संभवतः इनकी लेखनी से साहित्य-क्षेत्र में एक विशेष क्रान्ति आई और एक नव्य युग का सूत्रपात हुआ। अब विस्तार से…

परिचय…

फकीर मोहन सेनापति एक संपन्न व्यापारी पिता के एकमात्र संतान थे। परन्तु जब वे मात्र डेढ़ वर्ष के थे, तभी उनके माता-पिता दोनों का देहांत हो गया। फकीर मोहन सेनापति की संपूर्ण पैत्रिक संपत्ति अंग्रेजों ने हथिया ली और बालक को दर-दर की ठोकर खानी पड़ी। उनका लालन पालन उनकी दादी द्वारा किया गया। उन्होंने बाल्य काल में इनका नाम रखा था, ब्रजमोहन। परन्तु शोक-संतप्ता दादी ने अपने पौत्र को फकीर वेश में सजाकर पालती रहीं। इसीलिए ब्रजमोहन सेनापति ‘फकीरमोहन सेनापति’ के नाम से प्रसिद्ध हो गए। बचपन माता पिता के बिना गुजरा, जवानी पत्नी के और बुढ़ापा पुत्र से बिच्छिन्न होकर गुजरा। परंतु वे भगवान को बड़ा मानते थे, शायद इसी का इतना प्रभाव था कि वे असाधारण प्रतिभा के अधिकारी थे।

शिक्षा और कार्य…

गाँव की पाठशाला में पढ़कर उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अध्ययन को जारी रखा। कालांतर में बालेश्वर मिशन्‌ स्कूल में वे प्रधान शिक्षक बने। धीरे धीरे उनकी सारस्वत साधना रंग दिखाने लगी उनका प्रकाश चहुं ओर फैलने लगा। मातृभाषा उड़िया की सुरक्षा की दृष्टि से उन्होंने साहित्य में एक विप्लवात्मक पदक्षेप लिया। उस समय तक उड़ीसा में पुस्तकें छापने का छापाखाना नहीं था। फकीर मोहन ने पहला छापाखाना स्थापित किया और एक ‘पत्रिका’ का संपादन और प्रकाशन करने लगे। अब उनकी योग्यता की ख्याति देशी रियासतों में भी फैली और कुछ ने उन्हें ‘दीवान’ के पद पर नियुक्त किया। कुछ दरबारों में साहित्य-सेवा के कारण उन्हें उच्च स्थान प्राप्त हुआ। फकीर मोहन सेनापति ने अनेक कहानियों और उपन्यासों की रचना की।

लेखन कार्य…

फकीर मोहन सेनापति के दो उपन्यास ‘छह माण आठ गुंठ’ और ‘लछमा’ विशेष प्रसिद्ध हुए। उन्होंने मूल संस्कृत से रामायण, महाभारत, उपनिषद, हरिवंश पुराण और गीता का उड़िया भाषा में अनुवाद किया। वे आज भी उड़िया लेखकों के प्रेरणास्त्रोत माने जाते हैं। बालेश्वर में उनका गृह-उद्यान “शान्ति-कानन” आज भी साहित्यप्रेमी जनों के लिए एक पवित्र स्थल के रूप में दर्शनीय है।

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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