हीरा सिंह ठाकुर

आज हम बात करनेवाले हैं, आजाद हिन्द फौज के एक ऐसे सैनिक के बारे में जो कभी अंग्रेजो की सेना का सैनिक था, परंतु एक दिन वह उनसे अलग होकर सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में आकर जुड़ गया…

परिचय…

हीरा सिंह ठाकुर का जन्म २ अक्टूबर, १९२६ को सिरमौर रियासत के तहसील पच्छाद अंतर्गत मासरिया (शौटी) नामक गांव के गणेशा राम ठाकुर के घर हुआ था। जब वह मात्र डेढ़ वर्ष के रहे होंगे, तो उनकी माता का निधन हो गया था। उनके पिता जी गणेशा राम ठाकुर शिमला पुलिस में थे। माध्यमिक तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आर्थिक तंगी की वजह से १७ वर्ष की आयु में, ९ सिंतबर, १९४१ को अंबाला जाकर अंग्रेजी सेना में भर्ती हो गए।

आजाद हिन्द फौज…

परंतु उनका मन वहां नहीं लगा, मई १९४२ को वह आजाद हिन्द फौज में शामिल हो गए। एक बार स्वयं ठाकुर जी ने कहा था, ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नाम लेते ही आज भी मुझमें जोश आ जाता है। उनके जोशीले भाषण को जो भी सुनता, वह उनका मुरीद हो जाया करता था। उनका कोई मुकाबला नहीं था। हम भी उनके ओजस्वी विचारों को सुनकर ही आजाद हिन्द फौज में शामिल हुए थे।’ आजाद हिन्द फौज में हवलदार के रूप में ठाकुर जी ने सिंगापुर, बर्मा, नागालैंड में शांति स्थापना के कार्यों में योगदान दिया।

ऐसे शामिल हुए थे…

उसी वर्ष दिसंबर में सिंगापुर भेजा गया। वहां से मलेशिया पेट्रोल डिपो पर उनकी ड्यूटी लगी। इसके थोड़े अंतराल के बाद अंग्रेजों और जापानियों के मध्य युद्ध छिड़ गया। वे बटालियन के साथ सिंगापुर होते हुए जावा भेज दिए गए, परंतु वहां उन्हें बंदी बनाकर पुन: सिंगापुर लाया गया। ये लोग भारतीय नेताओं के चित्र व उनकी गतिविधियों से संबंधित पंपलेट वहां बांटा करते थे। आंखों पर पट्टियां बांधकर इन्हें सफर करवाया जाता। इसी प्रकार दीमापुर और इंम्फाल से होते हुए, इनके साथ अन्य सैनिकों को दिल्ली लाया गया। यहां इन्हें दो माह तक लाल किले की अंधेरी कोठरी में रखा गया। चारों ओर अंग्रेजी सिपाहियों का गहरा पहरा हुआ करता।

संस्मरण…

अपने संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने कहा था कि छोटी उम्र देखते हुए, ‘एक बार जलेबी का टुकड़ा दिखाकर उनसे स्वतंत्रता सेनानी केसरी चंद नामक साथी के खिलाफ गवाही देने को कहा गया इसके लिए इन्होंने साफ इंकार कर दिया। बाद में किसी अन्य की झूठी गवाही लेकर, केसरी चंद को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। लाल किला में दो माह रहने के बाद दो- दो सिपाहियों को हथकडिय़ां लगा कर अटक किला (वर्तमान पाकिस्तान) में कारावास के लिए भेज दिया गया। यहां दो साल रखने के बाद वर्ष १९४५ में शरद चंद्र बोस व जवाहरलाल नेहरू की ओर से उठाई गई आवाज के बाद अंग्रेजी सेना का व्यवहार कुछ हद तक बदला। बाद में इन्हें कोलकाता में लाकर कोर्ट मार्शल किया गया। २७ अप्रैल, १९४६ को हीरा सिंह ठाकुर कोर्ट मार्शल वर्ग तीन की श्रेणी में से इन्हें ब्लैक श्रेणी में रखकर घर तक का किराया और १० रुपए हाथ में रखकर डिसमिस कर घर भेज दिया गया।
अप्रैल १९४६ में डिसमिस होकर घर आए तो सराहां थाने ने उन पर जनसभाओं में भाषण देने या अन्य किसी प्रकार का प्रचार करने पर पाबंदी लगा दी। देश को आजादी मिलने के बाद उन्हें दोबारा भारतीय सेना से बुलाया गया। वह २५वीं बटालियन इंडियन गनेडियर राइफल्स में रहे। यहां से दोबारा सेवानिवृत हुए।’

आर्य समाज व अन्य कार्य…

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् ठाकुर हीरा सिंह आर्य समाज से जुड़ गए। आर्य समाज के बैनर तले सिरमौर में सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के कार्य में जुट गए। वर्ष १९८०-८१ में जब सरकार ने नारग में शराब का ठेका खोल दिया तो हीरा सिंह ठाकुर ने इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी। स्थानीय लोगों को इसके लिए साथ लिया और आंदोलन का नेतृत्व किया। वे आजाद हिन्द फौज के सिपाही थे,अतः पीछे हटना तो उन्होंने कभी सीखा नहीं था, ठाकुर जी के आगे सरकार को झुकना पड़ा और नारग में शराब का ठेका बंद हुआ। हिमाचल के राज्यपाल ने उन्हें तीन बार शिकायत निवारण समिति में सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया। शिक्षा के महत्व से वह भलिभांति परिचित थे, अतः वर्ष १९८९ में गांव शौटी में उन्होंने एक प्राइमरी स्कूल खोला। इस स्कूल का सारा खर्च वह स्वयं वहन करते थे। सात साल बाद हिमाचल सरकार ने अक्टूबर १९९६ में इस स्कूल को अपने अधीन ले लिया, जो आज भी चल रहा है। इसके अलावा उन्होंने वर्ष १९९२ में स्थानीय ग्राम पंचायत शाडिय़ा प्रधान के पद पर भी कार्य किया।

सम्मान…

भारत सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर इनकी सेवाओं के लिए इन्हें २५वें स्वतंत्रता दिवस और चालीसवें स्वतंत्रता दिवस पर दो बार ताम्र पत्र देकर सम्मान किए।

१. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इन्हें ताम्र पत्र प्रदान किया, जिसे इन्होंने १५ अगस्त, १९७२ को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार के हाथों कसौली में प्राप्त हुआ।
२. स्वतंत्रता के ४०वें वर्ष के अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पुन: ताम्र पत्र प्रदान किया, जिसे इन्होंने १५ अगस्त, १९८८ को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के हाथों श्री रेणुकाजी में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्राप्त किया।
३. ९ अगस्त, २००६ को भारत के राष्ट्रपति ने राष्ट्र के लिए उनके योगदान के लिए दिल्ली में इन्हें सम्मानित किया।
४. इनकी सेवाओं को देखते हुए नाहन की समाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यक संस्था ने १३ दिसंबर, १९९७ को इन्हें स्वंतत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित किया।
५. १४ नवंबर, २००९ को बाल दिवस के मौके पर इन्हें जागतिक स्वातन्त्रता सेनानी की उपाधि देकर सम्मानित किया गया।
६. सोलन की सिरमौर कल्याण मंच ने चार अगस्त २०१३ को इन्हें सोलन में सिरमौर सम्मान से नवाजा था।

अंत में…

आजाद हिंद फौज के हिमाचल से एकमात्र सिपाही व अंतिम फ्रीडम फाइटर हीरा सिंह ठाकुर ९६ वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह गए हैं। उनका देहांत ५ फरवरी, २०२२, शनिवार सुबह (८:३० बजे) उनके पैतृक गांव शोटी में हुआ। उम्र के इस पड़ाव में भी वह पूरी तरह तंदुरुस्त थे। पोते धीरज के अनुसार २ दिन पहले उन्हें बुखार हुआ था जिसकी दवा भी उन्होंने ली थी, मगर आज सुबह अचानक उनका देहांत हो गया।

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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