बाजीराव द्वितीय

बाजीराव द्वितीय मराठा साम्राज्य का तेरहवां व अंतिम पेशवा थे। इनके समय में मराठा साम्राज्य का पतन शुरू हो गया।

परिचय…

वर्ष १७७५ में जन्में बाजीराव द्वितीय, रघुनाथराव (राघोवा) का पुत्र था। वह अपने प्रधानमंत्री नाना फड़नवीस से बाजीराव सदा नफ़रत करता रहा। जब नाना फड़नवीस की मृत्यु हुई तो वह स्वतंत्र रूप से स्वयं ही मराठा साम्राज्य की सत्ता सम्भालना चाहता था, जबकि वह एक क़ायर और विश्वासघाती व्यक्ति था। उसने अपने निजी स्वार्थ के लिए अंग्रेज़ों की सहायता प्राप्त कर पेशवा का पद प्राप्त कर लिया। वह अपने राष्ट्र के साथ ही साथ अंग्रेज़ों के साथ भी ईमानदार नहीं रहा। उसकी धोखेबाज़ी और बेइमानी के कारण अंग्रेज़ों ने उसे बंदी बनाकर बिठूर भेज दिया, जहाँ 1 जनवरी, १८५१ अथवा १८५३ में उसकी मृत्यु हो गई।

होल्करों से पराजय…

वर्ष १८०० में नाना फड़नवीस की मृत्यु के बाद उसके रिक्त पद के लिए दौलतराव शिन्दे और जसवन्तराव होल्कर में प्रतिद्वन्द्विता शुरू हो गई। इधर बाजीराव द्वितीय छल कपट से इन दोनों को ही अपने नियंत्रण में रखना चाहता था, जिसकी वजह से मामला और उलझ गया। अब मामला उल्टा हो गया, शिन्दे और होल्कर अब पेशवा को अपने नियंत्रण में लेना चाहते थे उसके लिए एक दिन पूना के फाटकों के बाहर युद्ध शुरू हो गया। अपनी पेशवाई जाता देख, बाजीराव द्वितीय ने शिन्दे का साथ देना उचित समझा। लेकिन होल्कर की सेना ने उन दोनों की संयुक्त सेना को पराजित कर दिया।

अंग्रेज़ों से सन्धि…

भयभीत पेशवा बाजीराव द्वितीय ने वर्ष १८०१ में बसई भागकर अंग्रेज़ों की शरण ली और वहीं ३१ दिसंबर, १८०२ को एक अंग्रेज़ी जहाज़ के ऊपर संधि पर हस्ताक्षर कर दिये, जिसे ‘बसई की सन्धि’ कहा जाता है। संधि के अंतर्गत उसने ईस्ट इंडिया कम्पनी का आश्रित होना स्वीकार कर लिया। अंग्रेज़ों ने बाजीराव द्वितीय को राजधानी पूना में पुन: सत्तासीन करने का वचन दिया और पेशवा की रक्षा के लिए उसने राज्य में पर्याप्त सेना रखने की ज़िम्मेदारी ली। इसके बदले में पेशवा ने कम्पनी को इतना मराठा क्षेत्र देना स्वीकार कर लिया, जिससे कम्पनी की सेना का खर्च निकल आए। उसने यह भी वायदा किया कि वह अपने यहाँ अंग्रेज़ों से शत्रुता रखने वाले अन्य यूरोपीय देश के लोगों को नौकरी पर नहीं रखेगा। इस प्रकार बाजीराव द्वितीय ने अपनी रक्षा के लिए अंग्रेज़ों के हाथ अपनी स्वतंत्रता बेच दी। मराठा सरदारों ने बसई की संधि के प्रति अपना रोष प्रकट करना शुरू कर दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि पेशवा ने अपनी क़ायरता के कारण उन सभी की स्वतंत्रता बेच दी है। अत: उन लोगों ने इस आपत्तिजनक संधि को समाप्त कराने के लिए युद्ध की तैयारी की। परिणामस्वरूप द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध, जो वर्ष १८०३ से वर्ष १८०६ तक चला, जिसमें अंग्रेज़ों की जीत हुई और मराठा क्षेत्रों पर उनकी प्रभुसत्ता पूरी तरह से स्थापित हो गई।

इस बार संधि के द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध पेशवा बाजीराव द्वितीय को अच्छे नहीं लगे। उसने मराठा सरदारों में व्याप्त रोष और असंतोष का फ़ायदा उठाकर उन्हें अंग्रेज़ों के विरुद्ध दुबारा संगठित किया।

और अंत में…

नवम्बर, 1817 को बाजीराव द्वितीय के नेतृत्व में संगठित मराठा सेना ने पूना की ‘अंग्रेज़ी रेजीडेन्सी’ को लूटकर जला दिया और खड़की स्थिति अंग्रेज़ी सेना पर हमला कर दिया, लेकिन वहां वह पराजित हो गया। इसके बाद उसने दो और लड़ाइयां लड़ी…

१. जनवरी, १८१८ में, भीमा कोरेगाव की लडाई : अंग्रेजो ने ५०० महार सैनिकों के साथ अपनी एक छोटी टुकड़ी के बल पर पेशवा के २७,००० मराठा सैनिकों को पराजित कर दिया।

२. आष्टी की लड़ाई : पहली लड़ाई के एक महीने के बाद आष्टी की लड़ाई में भी पेशवा पराजित हुआ। इस बार उसने भागने की कोशिश की, लेकिन ३ जून, १८१८ को उसे अंग्रेज़ों के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा। अंग्रेज़ों ने इस बार पेशवा का पद ही समाप्त कर दिया और बाजीराव द्वितीय को अपदस्थ करके बंदी के रूप में कानपुर के निकट बिठूर भेज दिया जहाँ १ जनवरी, १८५१ अथवा १८५३ ईस्वी में उसकी मृत्यु हो गई।

मराठों की स्वतंत्रता नष्ट करने के लिए बाजीराव द्वितीय सबसे अधिक जिम्मेदार था।

अमृत राव 

नाना फड़नवीस

अश्विनी रायhttp://shoot2pen.in
माताजी :- श्रीमती इंदु राय पिताजी :- श्री गिरिजा राय पता :- ग्राम - मांगोडेहरी, डाक- खीरी, जिला - बक्सर (बिहार) पिन - ८०२१२८ शिक्षा :- वाणिज्य स्नातक, एम.ए. संप्रत्ति :- किसान, लेखक पुस्तकें :- १. एकल प्रकाशित पुस्तक... बिहार - एक आईने की नजर से प्रकाशन के इंतजार में... ये उन दिनों की बात है, आर्यन, राम मंदिर, आपातकाल, जीवननामा - 12 खंड, दक्षिण भारत की यात्रा, महाभारत- वैज्ञानिक शोध, आदि। २. प्रकाशित साझा संग्रह... पेनिंग थॉट्स, अंजुली रंग भरी, ब्लौस्सौम ऑफ वर्ड्स, उजेस, हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद, गंगा गीत माला (भोजपुरी), राम कथा के विविध आयाम, अलविदा कोरोना, एकाक्ष आदि। साथ ही पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग आदि में लिखना। सम्मान/पुरस्कार :- १. सितम्बर, २०१८ में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विश्व भर के विद्वतजनों के साथ तीन दिनों तक चलने वाले साहित्योत्त्सव में सम्मान। २. २५ नवम्बर २०१८ को The Indian Awaz 100 inspiring authors of India की तरफ से सम्मानित। ३. २६ जनवरी, २०१९ को The Sprit Mania के द्वारा सम्मानित। ४. ०३ फरवरी, २०१९, Literoma Publishing Services की तरफ से हिन्दी के विकास के लिए सम्मानित। ५. १८ फरवरी २०१९, भोजपुरी विकास न्यास द्वारा सम्मानित। ६. ३१ मार्च, २०१९, स्वामी विवेकानन्द एक्सिलेन्सि अवार्ड (खेल एवं युवा मंत्रालय भारत सरकार), कोलकाता। ७. २३ नवंबर, २०१९ को अयोध्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, अयोध्या, उत्तरप्रदेश एवं साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली के साझा आयोजन में सम्मानित। ८. The Spirit Mania द्वारा TSM POPULAR AUTHOR AWARD 2K19 के लिए सम्मानित। ९. २२ दिसंबर, २०१९ को बक्सर हिन्दी साहित्य सम्मेलन, बक्सर द्वारा सम्मानित। १०. अक्टूबर, २०२० में श्री नर्मदा प्रकाशन द्वारा काव्य शिरोमणि सम्मान। आदि। हिन्दी एवं भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पित कार्यों के लिए छोटे बड़े विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित। संस्थाओं से जुड़ाव :- १. जिला अर्थ मंत्री, बक्सर हिंदी साहित्य सम्मेलन, बक्सर बिहार। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना से सम्बद्ध। २. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह न्यासी, भोजपुरी विकास न्यास, बक्सर। ३. जिला कमिटी सदस्य, बक्सर। भोजपुरी साहित्य विकास मंच, कलकत्ता। ४. सदस्य, राष्ट्रवादी लेखक संघ ५. जिला महामंत्री, बक्सर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद। ६. सदस्य, राष्ट्रीय संचार माध्यम परिषद। ईमेल :- ashwinirai1980@gmail.com ब्लॉग :- shoot2pen.in

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