July 24, 2024

ड्रग्स केस नियम…

ड्रग्स के कानून को जानने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि सीआरपीसी की धारा ४३७ के अनुसार, गैर जमानती मामलों में भी किसी भी आरोपी को जमानत मिलने का अधिकार है, इससे आरोपी जमानत के लिए अर्जी डालता है और केस के आधार पर उसे जमानत मिलती भी है। इसके अलावा धारा ४३९ में भी सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट को जमानत को लेकर विशेष अधिकार प्राप्त है। यह बात उच्च न्यायालय के एक काबिल अधिवक्ता का कहना है। उन्होंने आगे कहा कि, ‘ड्रग्स के मामले में नियम काफी कठोर और अलग हैं। दरअसल, होता यह है कि ड्रग्स से जुड़े मामले नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (NDPS) एक्ट १९८५ के तहत निपटाए जाते हैं, जिसमें जमानत को लेकर अलग नियम हैं। यह कानून १४ नवंबर, १९८५ में १९४० के ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के स्थान पर बनाया गया था। इसमें १९८९, २००१, २०१४ में संशोधन हो चुका है। एनडीपीएस एक्ट में नॉर्कोटिक्स ड्रग्स का उत्पादन, अपने पास रखना, उसकी बिक्री करना, खरीदना, व्यापार करना, आयात या निर्यात करना, उपयोग और उपभोग करना अपराध है। लेकिन, चिकित्सा और विज्ञान के लिए इन ड्रग्स की छूट दी गई है। इस कानून में दोषी व्यक्ति को नशामुक्ति केंद्र भेजने से लेकर जेल भेजने और और जुर्माने की सजा दी जाती है।

ड्रग्स केस में जमानत….

दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रेम जोशी जी के अनुसार, ‘ड्रग्स केस में इसलिए जल्दी जमानत नहीं मिलती है, क्योंकि एनडीपीएस में दो धारा २७ए और २९ ऐसे हैं, जिससे जमानत मिलने में काफी मुश्किल होती है। जानकारी के लिए बताते चलें कि रिया चक्रवर्ती मामले में भी इन धारा की वजह से ही जमानत मिलने में मुश्किल हुई थी और एक महीने का वक्त लग गया था। ऐसे ही आर्यन केस में भी है और इन दोनों धारा के इर्द-गिर्द बहस होती है।’ साथ ही उन्होंने आगे बताया कि, धारा २७ए में कहा गया है कि जो भी कोका प्लांट या अफीम के उत्पादन, निर्माण, बिक्री, खरीद, परिवहन, उपयोग या उपभोग, आयात और निर्यात करने जैसी गतिविधि में शामिल होता है अथवा ऐसी गतिविधि में लिप्त किसी भी व्यक्ति को शरण देता है, उसे भी कम से कम १० वर्ष के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे १० वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है साथ ही जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी माना जाएगा। वहीं धारा २९ में कहा गया है कि अगर कोई ऊपर बताए गए अपराध आदि के लिए उकसाता भी है और उसे दंडित किया जाता है, चाहे वो अपराध उसके उकसावे की वजह से हुआ है या नहीं। जैसे मान लीजिए अगर किसी मामले में ड्रग पेडलर भी आरोपी है और अन्य लोगों को सजा मिलती है तो सेक्शन २९ के तहत उसे भी सजा मिलती है, भले ही उसकी सक्रिय भूमिका ना रही हो।

अगर ड्रग्स केस में मिलने वाली जमानत की बात करें तो इसमें धारा ३७ के तहत आरोपी को जमानत दी जाती है, मगर कुछ शर्तों पर। जैसे ; सरकारी वकील को जमानत की अर्जी पर विश्वास हो और वह जमानत का विरोध ना करे। साथ ही आरोपी को स्वयं बेगुनाही साबित करनी होती है और कोर्ट को यह विश्वास दिलाना होता है कि वह दोषी नहीं है और रिहाई के बाद ऐसा दुबारा नहीं करेगा। इस पर भी एक बाधा है क्योंकि, अगर पुलिस यह कहे कि जमानत देने से जांच में बाधा आ सकती है तब तो फिर रिहाई मुश्किल ही होती है और जमानत याचिका रद्द हो सकती है। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि मुंबई ड्रग्स मामले यानी आर्यन खान (बालीवुड अभिनेता शाहरुख खान का पुत्र) के केस में ऐसा ही कुछ हो रहा है जिसमें आर्यन और उनके साथियों को जमानत नहीं मिल रही है।

आर्यन खान केस…

आर्यन खान को एनसीबी ने ३ अक्टूबर को मुंबई तट पर कॉर्डेलिया क्रूज जहाज पर एक रेव पार्टी में छापेमारी के दौरान  गिरफ्तार किया था। इसक बाद ७ अक्टूबर को कोर्ट ने आर्यन को १४ दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। वह फिलहाल मुंबई के आर्थर रोड जेल में बंद है। आर्यन खान के साथ एजेंसी ने सात अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था। इस मामले में विदेशी नागरिकों और कथित ड्रग तस्करों सहित कुल बीस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आर्यन खान के साथ गिरफ्तार लोगों में मुनमुन धमेचा, अरबाज मर्चेंट, इसमीत सिंह, मोहक जसवाल, गोमित चोपड़ा, नूपुर सतीजा और विक्रांत छोकर के नाम शामिल हैं। मामले में जांच कर रही एजेंसी के अधिकारियों ने बताया था कि उन्होंने छापेमारी के दौरान १३ ग्राम कोकीन, ५ ग्राम एमडी, २१ ग्राम चरस, एमडीएमए (एक्स्टसी) की २२ गोलियां और १.३३ लाख रुपये नकद जब्त किए थे।

जमानत याचिका…

आर्यन खान की जमानत याचिका में उसके वकील ने कहा है कि, वह निर्दोष है और उसने कोई अपराध नहीं किया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह एक स्वीकृत स्थिति है कि आर्यन खान से कोई वसूली नहीं हुई है और एनसीबी के कब्जे में उसके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं है।

एनसीबी का जवाब…

आर्यन ने छापेमारी के समय ड्रग्स का सेवन किया था और व्हाट्सएप चैट के आधार पर वह अंतर्राष्ट्रीय ड्रग तस्करी रैकेट का हिस्सा है। एनसीबी ने आगे कहा है कि आर्यन बड़ी मात्रा में ड्रग्स का कारोबार करता था और उसके फोन से बरामद चैट में पैसे के लेन-देन के भरपूर सबूत थे। वहीं, इससे पहले आर्यन खान की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एनसीबी ने कोर्ट से कहा था कि उनके पास ऐसे सबूत मौजूद हैं जो ये बताते हैं कि आर्यन काफी सालों से प्रतिबंधित ड्रग्स का सेवन कर रहा है। इतना ही नहीं उसने अन्य देशों में भी नशा किया है।

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