मधुबाला के शाश्वत सौंदर्य पर एक विशेष कविता: “नज़्म-ए-मोहब्बत” | अश्विनी राय ‘अरुण’

वो आ जाए तो नज़्म मुकम्मल हो जाए   ज़मीं पे चाँद उतरा है, या … Continue reading मधुबाला के शाश्वत सौंदर्य पर एक विशेष कविता: “नज़्म-ए-मोहब्बत” | अश्विनी राय ‘अरुण’