सोने के लिए जागना: किताबों और रातों के सन्नाटे पर एक गहरी कविता | अश्विनी राय ‘अरूण’

​सोने के लिए जागना ​घर की उस मद्धम अटारी पर, कथा-किताबें मौन भरी हैं; मानो … Continue reading सोने के लिए जागना: किताबों और रातों के सन्नाटे पर एक गहरी कविता | अश्विनी राय ‘अरूण’