सुख और दुख से परे मैं…युगान्तर बना फिरता हूँवक्त...
श्री कृष्ण
सर्वोपनिषदो गावो दोग्धा गोपालनन्दन:। पार्थो वत्स: सुधीर्भोक्ता दुग्धं गीतामृतं...
यथार्थ