Category: पुस्तक समीक्षा

सच्ची रामायण का सच भाग – १

राम! राम! राम! राम! राम! राम! राम! राम! राम! राम! भगवान श्रीराम हम सनातनियों के लिये आदर्श हैं, पूजनीय हैं और अगर मानवीय रूप में कहें तो महापुरुष हैं। उनका जीवन शैली, चरित्र...

जूलियस सीजर

सन् १६०१ से १६०४ ई. के मध्य शेक्सपियर द्वारा लिखित जूलियस सीज़र अंग्रेजी भाषा का एक दुःखान्त नाटक है। यह नाटक निराशा, वेदना और तिक्तता से अधिक कुछ भी नहीं देता। वैसे...

गीता जयंती

गीता जयंती... प्रत्‍येक वर्ष मार्गशीर्ष मास के शुक्‍लपक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी भी कहते हैं जो उत्पन्ना एकादशी के बाद आती है। इस वर्ष...

हिंदी साहित्य और राष्ट्रवाद

हमारी नई साझा संग्रह... #हिन्दी_साहित्य_और_राष्ट्रवाद संपादक : डॉ रघुनाथ पाण्डेय डॉ दिलीप कुमार अवस्थी हिन्दी लेखकों और हिन्दी भाषा जानने वालों का सदा से ही यह कहना है कि हिन्दी दिवस केवल सरकारी कार्य की तरह...

पुस्तक समीक्षा : चरित्र और कलम

आदरणीय मंच, अध्यक्ष जी एवं प्रबुद्धजन को अश्विनी राय 'अरूण' का प्रणाम! हिंदी साहित्य में लघुकथा नवीनतम् विधा है। हिंदी के अन्य सभी विधाओं की तुलना में...

पुस्तक समीक्षा : नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में नव फासीवादी मनोवृति

नागरिकता संशोधन कानून की पूरी सच्चाई को दर्शाती: नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में नव फासीवादी मनोवृति (पुस्तिका), समीक्षा (अश्विनी राय ‘अरूण’) पुस्तक परिचय :- नागरिकता...

पुस्तक समीक्षा : मेरे सपनों की सरकार

पुस्तक : मेरे सपनों की सरकार (५५ माह बनाम ५५ साल) लेखक : डॉ स्वामीनाथ तिवारी (MLA, ब्रह्मपुर : १९९०) सपनों का अतीत से गहरा रिश्ता होता है। मनोविज्ञान के जानकार लोग ऐसा दावा भी करते...

तीन नाटक

तीन_नाटक :- करवट, रसातल, दुश्मन। स्थान : रादुका प्रकाशन, मास्को, सोवियत संघ। लेखक : मक्सिम गोर्की अनुवादक : डॉ. मधु पुस्तकों के सफाई के क्रम में मेरी नजर मक्सिम गोर्की की एक पुस्तक पर पड़ी। "तीन...

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पंचगंगा घाट

काशी की बसावट के लिहाज से शहर के उत्तरी छोर से गंगा की विपरीत धारा की ओर चलें तो आदिकेशव घाट व राजघाट के...

आदिकेशव घाट

काशी में गंगा तट पर अनेक सुंदर घाट बने हैं, ये सभी घाट किसी न किसी पौराणिक या धार्मिक कथा से संबंधित हैं। काशी...

मामा जी की स्मृति से

अपने बेटों से परेशान होकर एक महोदय कैंट स्टेशन के एक बैंच पर सोए हुए थे। उन्हें कहीं जाना था, मगर कहां यह उन्हें...