July 22, 2024

बात ०६ दिसंबर, १९९२ की है, जब बाबरी ढांचा को गिरा दिया गया था। उस दिन अयोध्या में सुबह से ही इस ढांचे के चारों ओर भीड़ जमा होने लगी थी और दोपहर बीतते बीतते इसके ध्वंस की खबरें भी आने लगीं। उस समय उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे। उनके समेत लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती के साथ कल्याण सिंह पर भी इस मामले में साजिश रचने के आरोप लगा था। इस मामले में इन लोगों पर केस भी दर्ज हुए थे और बाद में कल्याण सिंह को इस मामले में एक दिन की जेल की सजा भी हुई थी। उस समय काशी के ज्ञानवापी मंदिर(अभी तक मस्जिद) के व्यासजी के तहखाने में व्यास परिवार पूजा-अर्चना किया करता था, जो ज्ञानवापी परिसर में दक्षिण की ओर स्थित है। 

 

व्यासजी के तहखाने को बंद कर दिया गया…

वर्ष १९९३ में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अयोध्या राम जन्मभूमि मामले को लेकर काशी के ज्ञानवापी में बैरिकेडिंग लगा दी कि यहां सांप्रदायिक माहौल ना बिगड़े और लड़ाई-झगड़े ना हों। पहले बांस-बल्ली लगाकार टेंपरेरी तौर पर बैरिकेडिंग की गई और बाद में पक्की तरह से बंद कर दिया गया। तभी से वहां पूजा करना बंद थी।

यह तहखाना ज्ञानवापी में ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद है, जहां हिंदू धर्म से जुड़े चिन्ह जैसे स्वास्तिक, कमल और ओम की आकृतियां पाई गई हैं। पिछले साल 25 सितंबर को व्यास परिवार की तरफ से तहखाने में पूजा-अर्चना करने की अनुमति के लिए याचिका दाखिल की गई थी, जिसके बाद ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे में व्यासजी के तहखाने की भी जांच हुई। जांच में तहखाने के अंदर मंदिर के सबूत मिले और कोर्ट ने बुधवार को व्यासजी के तहखाने में पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी। जिला कोर्ट के जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश ने प्रशासन को व्यासजी के तहखाने में पूजा-अर्चना करने की व्यवस्था करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है।

 

व्यासजी के तहखाने का स्थान…

वर्ष १९९३ से पहले व्यासजी के तहखाने में पूजा-पाठ करने वाले व्यास परिवार के पोते आशुतोष व्यास जी के अनुसार, ज्ञानवापी के अंदर १० तहखाने मौजूद हैं। व्यासजी का तहखाना ज्ञानवापी में दक्षिण की ओर स्थित है। यहां मौजूद १० तहखानों में से दो तहखानों को खोला गया है। कोर्ट में वाद दाखिल कर बताया गया कि व्यासजी का तहखाना ज्ञानवापी परिसर में नंदी भगवान के ठीक सामने है। यह तहखाना प्राचीन मंदिर के मुख्य पुजारी व्यास परिवार की मुख्य गद्दी है। यह वह स्थान है, जहां ४०० वर्ष से व्यास परिवार शैव परंपरा से पूजा-पाठ करता था। ब्रिटिश काल में भी मुकदमा जीतकर व्यास परिवार का तहखाने पर कब्जा बरकरार रहा।

आशुतोष व्यास ने आगे कहा, ‘पहले हमारे परिवार के लोग पूजा-पाठ और अर्चना किया करते थे। हम गए हैं अंदर। हर साल ही जाते हैं। वहां रामचरितमानस होता है ज्ञानवापी में। उसके पास ही बांस बलियां रखी होती हैं। अंदर बहुत अंधेरा रहता है।’ उन्होंने यह भी बताया कि अंदर कई शिवलिंग हैं। शिवलिंग हैं, नंदी हैं, टूटे-फूटे नंदी होंगे और बताते हैं कि खंभों में कमल, स्वास्तिक और ओम की आकृतियां बनी हैं। आशुतोष व्यास का कहना है कि १९९३ से पहले अंदर जलाभिषेक होता था और रुद्राभिषेक किया जाता था। आरती, पूजा, भजन सब होता था। तीन समय की पूजा होती थी। सुबह की पूजा के बाद मध्याह्न में भगवान को भोग लगता था और संध्या में पूजा एवं आरती होती थी।

 

व्यासजी में पूजा के लिए याचिका…

२५ सितंबर, २०२३ को शैलेंद्र पाठक ने वाद दाखिल कर व्यासजी के तहखाने में पूजा-पाठ फिर से शुरू करने की अनुमित मांगी थी। शैलेंद्र पाठक व्यास परिवार से ही हैं। हिंदू पक्ष ने अनुरोध किया कि कोर्ट रिसीवर नियुक्त करे जो तहखाने में पुजारी द्वारा पूजा किया जाना नियंत्रित करे और उसका प्रबंध करे। यह भी दलील दी गई कि तहखाने में जो मूर्तियां मौजूद हैं उनकी नियमित रूप से पूजा किया जाना आवश्यक है। सर्वे में भी वहां हिंदू धर्म से जुड़े चिन्ह और मंदिर होने के सबूत मिले। इसके बाद कोर्ट ने १७ जनवरी, २०२४ को एक आदेश पारित कर रिसीवर नियुक्त कर दिया, लेकिन पूजा-अर्चना के संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया। फिर 31 जनवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने हिंदू पक्ष को व्यासजी के तहखाने में पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी।

 

कोर्ट का फैसला…

३१ जनवरी को कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद व्यासजी के तहखाने में पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी। साथ ही कोर्ट ने प्रशासन को एक हफ्ते का समय दिया, जिसमें तहखाने में पूजा करने की व्यवस्था करनी होगी। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन की मीटिंग हुई और ग्यारह घंटे बाद ही कोर्ट के आदेश का अनुपालन किया गया और तहखाने में शयन आरती हुई। रात को ढाई बजे के आस-पास ३१ वर्ष बाद व्यासजी के तहखाने में दीप जलाया गया। उसके बाद एक फरवरी से तीनों समय की नियमित पूजा शुरू कर दी गई।

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