फ़िल्म समीक्षा: ‘बरसात’ (१९४९) — प्रेम की आकुलता, संगीतमय सौंदर्य और ‘आर. के. फ़िल्म्स’...
प्रेमचंद की कहानी ‘सद्गति’: सामाजिक यथार्थ या घृणा फैलाने वाला प्रायोजित कथानक?   ‘सद्गति’...
धर्मवीर भारती का ‘अंधा युग’: महाभारत का पुनर्मूल्यांकन या सनातन दर्शन का निराशावादी विकृतीकरण?...
अज्ञेय का ‘शेखर: एक जीवनी’: ‘व्यक्ति-स्वातंत्र्य’ का सौंदर्य या अनैतिकता और उग्र-अहंकार का उदात्तीकरण?...
कमलेश्वर का ‘कितने पाकिस्तान’: वैश्विक शांति का महाकाव्य या इस्लामी कट्टरवाद का छद्म-सेक्युलर बचाव?...
फ़िल्म समीक्षा: ‘अंदाज़’ (१९४९) — आधुनिकता, त्रिकोणीय प्रेम और सामाजिक रूढ़ियों का अमर महाकाव्य...
फ़िल्म समीक्षा: ‘अमर प्रेम’ (१९४८) — सामाजिक रूढ़ियाँ, विरह का अवसाद और निश्छल प्रेम...
फ़िल्म समीक्षा: ‘गोपीनाथ’ (१९४८) — ग्लैमर का चकाचौंध, निश्छल प्रेम और मानवीय दुर्बलताओं का...
फ़िल्म समीक्षा: ‘जेल यात्रा’ (१९४७) — सामाजिक सुधार, सुधारवादी हास्य और एक विद्रोही युवक...