साहित्यिक प्रतियोगिता : १.१०
विषय : चमत्कार
दिनाँक : १०/१२/१९

ए भाई, इधर देखो ना!
इस भिखारी को…
क्या हुआ ? क्या देखूँ ?
ये कल भी तो यहीं था ना,
हाँ ! था तो ?
कल मैंने इसके बगल में
एक सेल्फी ली थी।
रोटी देते हुए।
परसों भी इसे यहीं देखा था।
सुना था ये कल तक मर जाएगा,
लेकिन एक दिन और बीत गया।

कहना क्या चाहते हो?

मैंने सोचा था!
आज ये मर गया होगा।
आज फिर से एक सेल्फी लूंगा,
उसे पोस्ट करूंगा,
करुणा सागर बन कर,
छा जाऊंगा पूरे दोस्तों में।

मगर, अफसोस आज भी ? ?
सब उसकी माया है,
उसी का चमत्कार है,
कल की एक सेल्फी से,
यह जी गया।

वाह! क्या बात है ?
सेल्फी, पोस्ट, लाईक, कमेंट से
ज़िन्दगी की लड़ाई,
आदमी जीत गया।

ए भाई, मैं तो ये कहता हूँ।
आज फिर एक रोटी के साथ,
एक सेल्फी ले ले,
फिर से लाइक, कमेंट बटोर ले।

एक दिन और बीत जाने दे,
एक दिन और इसे जी जाने दे,
एक बार फिर चमत्कार हो जाने दे।

अश्विनी राय ‘अरूण’

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