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पशुपालन (चारा) घोटाला?

लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पशुपालन (चारा) घोटाले में सीबीआई ने कुल ६६ मामले दर्ज कराए थे। इनमें से छह में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को भी अभियुक्त बनाया गया था।

असलियत…

बात अस्सी और नब्बे के दशक की है पशुपालन विभाग ने बिहार के विभिन्न कोषागारों से फर्जी बिल्स के आधार पर तकतीबन ९०० करोड़ रुपये की अवैध निकासी की जानकारी मिली। अधिकारियों के मुताबिक ट्रेजरी की जाँच के क्रम में जब ये बातें अधिकारियों को पता चलीं, तो उनके लिए यह यकीन करना बड़ा मुश्किल हो गया था। क्योंकि, तय बजट से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी थी और की जा रही थी। वर्ष १९८५ में बिहार के तत्कालीन महालेखाकार ने भी इस पर आपत्ति की, पर तब उन्हें जरुरी ब्योरे नहीं मिल रहे थे। उस समय बिहार में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और डॉ जगन्नाथ मिश्र बिहार के मुख्यमंत्री थे। इस बीच समय बदला और बिहार की सत्ता भी बदली और वर्ष १९९० में तत्कालीन जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री बने। परंतु अवैध बिल पर धन निकासी उसी तरह धारा प्रवाह गति से जारी रही। ऊपर दिए आंकड़े वर्ष १९९० के बाद के हैं। वर्ष १९९६ में यह पहली बार व्यापक चर्चा का विषय बना। बिहार सरकार के युवा आइएएस अधिकारी अमित खरे को चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम) जिले का उपायुक्त बनाकर भेजा गया। उन्होंने चाईबासा ट्रेजरी में छापा मारकर कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी और ट्रेजरी को सील कर दिया, तब जाकर यह घोटाला पकड़ में आया। उसके बाद शुरू हुई, अन्य कोषागारों की छापेमारी। परंतु बिहार पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज की मगर हुआ कुछ भी नहीं। तब यह मामला सीबीआई के पास चला गया। सीबीआई की जांच में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की संलिप्तता पाई गई।

अपनी बात न्यायपालिका से…

लालू जी अगर सही हैं, तो उन्हें पूर्ण रूप से आजाद कर दीजिए और गलत हैं तो उन्हें पूरी सजा दीजिए। राजनीति नेताओं के लिए छोड़ देना ही ठीक रहेगा, आप बस निष्पक्ष फैसला कीजिए।

मामला और सजा…

१. ईबासा कोषागार से अवैध निकासी : घोटाले की राशि ३७.७ करोड़ रुपए।

सजा : ५ साल कैद और २५ लाख का जुर्माना। मगर ३७.७ करोड़ रुपए का ब्योरा अभी बाकी है।

२. देवघर सरकारी कोषागार से निकासी : घोटाले की राशि ८४.५३ लाख रुपए।

सजा : ३.५ साल कैद ५ लाख रुपए का जुर्माना। मगर ८४.५३ लाख रुपए का ब्योरा अभी बाकी है।

३. चाईबासा कोषागार से निकासी : घोटाले की राशि ३३.६७ करोड़ रुपए।

सजा : ५ साल कैद १० लाख रुपए का जुर्माना। मगर ३३.६७ करोड़ रुपयों का ब्योरा अभी बाकी है।

४. दुमका कोषागार : घोटाले की राशि ३.१३ करोड़ रुपए

सजा : ७ साल कैद ६० लाख रुपए का जुर्माना। मगर ३.१३ करोड़ रुपए कहां गए।

५. डोरंडा कोषागार : घोटाले की राशि १३९ करोड़ रुपए।

सजा : ५ साल कैद ६० लाख रुपए का जुर्माना। मगर १३९ करोड़ रुपयों का ब्योरा अभी बाकी है।

व्यंग : इस तरह कहा जा सकता है कि जवानी के दिनों में किसी भी तरह रुपए लूट लो और परिजनों के लिए छोड़ जाओ। और फिर जेल में सरकारी पैसे पर दवा और दावा मुफ्त पाओ। उस पर से बोनस के रूप में जनता की सहानुभूति अलग से प्राप्त करो।

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