अर्जुन की छाल का काढ़ा: बागभट्ट जी के सूत्रों पर आधारित दूध पीने का सही तरीका
आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ अष्टांगसंग्रह तथा अष्टांगहृदय के रचयिता बागभट्ट जी सुबह दूध पीने को मना करते हैं, लेकिन हम सुबह सुबह जो चाय पीते हैं उसमें दूध का प्रयोग आवश्यक रूप से करते हैं। जबकि बाग़भट्ट जी ने अपने किसी भी सूत्र और शास्त्र में चाय का उल्लेख नहीं किया है। बागभट्ट जी का वक्त ३५०० वर्ष पूर्व रहा है और चाय मात्र २५० वर्ष पहले अंग्रेजों के द्वारा लाई गई है।
🔥 अर्जुन की छाल ही क्यों? वात और हार्ट अटैक से बचाव
हाँ! बागभट्ट जी ने काढ़े का जिक्र अवश्य किया है। वो कहते हैं, जो काढ़ा हमारे वात पित्त और कफ को कम करे ऐसा कोई भी काढ़ा सुबह दूध में मिलाकर पिया जा सकता है, जैसे; अर्जुन की छाल का काढ़ा वात को सबसे ज्यादा कम करता है। यह रक्त की एसिडिटी को कम करता है जो की शरीर की एसिडिटी से भी ज्यादा खतरनाक होती है और हार्ट अटैक का कारण बनती है अर्जुन की छाल सबसे तेजी से रक्त की एसिडिटी को खत्म करता है इसलिए अर्जुन की छाल का काढ़ा अवश्य पीएं
📅 काढ़ा पीने का सही समय: वात दोष को नियंत्रित करें
नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी और फ़रवरी में वात सबसे ज्यादा होता है। ठण्ड के दिनों में वायु का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है और उस समय अर्जुन की छाल का काढ़ा गर्म दूध में मिलाकर पीयें तो औषधि का काम करेगा। जानकारी के लिए बताते चलें कि काढ़े की तासीर हमेशा गर्म होती है इसलिए इसे ठण्ड के समय में ही प्रयोग करना चाहिए। हमारे देश में कोई भी ठंडा काढ़ा नही होता, यदि आप सुबह दूध पीना चाहते हैं तो अर्जुन की छाल के काढ़े के साथ पीयें।
✅ अर्जुन की छाल के मुख्य फायदे: कोलेस्ट्रोल और दर्द से राहत
इससे आपको दो फायदे होंगे भविष्य में आपको हार्ट अटैक कभी नहीं होगा। क्योंकि यह छाल का काढ़ा रक्त को साफ करता है और शरीर में सबसे ज्यादा कचरा(कोलेस्ट्रोल) रक्त में ही होता है।
💰 मूल्य और तुलना: चाय और कॉफ़ी से सस्ता, स्वास्थ्य के लिए बेहतर
सबसे बड़ी बात तो यह है कि अर्जुन की छाल २० रूपये किलो मिलती है, जो आप पंसारी की दुकान से ले सकते हैं और चाय दो सौ रूपये किलो और १४०० रूपये किलो कॉफ़ी मिलती है। इसलिए ठंड के समय सुबह में चाय की जगह अर्जुन की छाल का काढ़ा दूध के साथ अवश्य पीएं।
🥣 सेवन विधि: अर्जुन की छाल का काढ़ा कैसे बनाएं?
एक गिलास दूध और आधा चम्मच अर्जुन की छाल का पाउडर और अगर गुड़। ध्यान रहे चीनी का इस्तेमाल न करे अगर मिश्री मिले तो वह गुड़ से भी अच्छा होता है। सोंठ है तो उसे भी मिलाया जा सकता है, जिससे वह और भी उत्तम क्वालिटी का बन जायेगा। क्योंकि अर्जुन छाल और सोंठ दोनों ही वात नाशक हैं।
जाने कौन से रोगों से मिलेगा छुटकारा…
इसे पीने से हड्डियों के समस्त विकार एवं शरीर में वात के सभी रोग जैसे घुटने का दर्द, कंधे का दर्द, डायबिटीज, हार्ट अटैक ये सब वात के रोग हैं, जो इसके पीने से शांत हो जाते हैं।
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’