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परिचय

बांग्लादेश के हालात ठीक वैसे ही बनते जा रहे हैं, जैसे कुछ वक्त पहले पाकिस्तान के थे। पाकिस्तान की तरह ही अंदरूनी कलह से जूझ रहे बांग्लादेश में लॉन्ग मार्च का आह्वान किया।

 

बांग्लादेश तख्तापलट: कैसे हुआ शेख हसीना का पतन?

छात्र नेताओं ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर सविनय अवज्ञा आंदोलन की घोषणा की। ढाका ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक शेख हसीना ने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद आर्मी चीफ ने एक अंतरिम सरकार के गठन का ऐलान किया है। अखबारों की मानें तो शेख हसीना ने भारत मे शरण लिया है।

 

दैनिक अखबार हिन्दुस्तान के अनुसार

दैनिक अखबार हिन्दुस्तान के अनुसार; बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की योजना लंदन में बनाई गई थी। इसमें पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस अर्थात आईएसआई का बड़ा हाथ माना जा रहा है। अखबार कहता है कि खुफिया रिपोर्टों में इसका खुलासा हुआ है। इस योजना के बाद ही बांग्लादेश में आरक्षण प्रणाली के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके परिणाम स्वरूप शेख हसीना सरकार का पतन हुआ। बांग्लादेशी अधिकारियों ने दावा किया है कि उनके पास बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक प्रमुख और खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान और सऊदी अरब में आईएसआई अधिकारियों के बीच बैठकों के सबूत हैं।

 

तख्तापलट के पीछे अंतर्राष्ट्रीय साज़िश और ISI की भूमिका

अखबार कहता है कि इनमें कुछ बैठकें लंदन में भी हुईं। इन बैठकों में बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की विस्तृत योजना तैयार की गई थी। बांग्लादेशी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इन बैठकों में देश के भीतर अस्थिरता फैलाने और सरकार को गिराने के उद्देश्य से विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा की गई थी। तारिक रहमान वर्तमान में निर्वासन में हैं, मगर उन पर पहले भी कई बार बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने के आरोप लगे हैं।

इस पर इंडिया टुडे कहता है कि हिंसा की शुरुआत में, एक्स पर कई “बांग्लादेश विरोधी” हैंडल लगातार विरोध को हवा दे रहे थे। शेख हसीना सरकार के खिलाफ ५०० से अधिक नकारात्मक ट्वीट किए गए, जिनमें पाकिस्तानी हैंडल से किए गए ट्वीट भी शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का लक्ष्य हसीना की सरकार को अस्थिर करना और विपक्षी बीएनपी को सत्ता में लाना है।

 

चीन और पाकिस्तान समर्थक BNP का उदय

बीएनपी अर्थात बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को पाकिस्तान समर्थक और भारत का विरोधी माना जाता है। आईएसआई के माध्यम से चीन ने भी विरोध प्रदर्शनों को बढ़ाने में भूमिका निभाई, जिसके कारण हसीना को अंततः भारत भागना पड़ा। नौकरी में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन हसीना के खिलाफ एक व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया, जिसमें ३०० से अधिक लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए।

 

विरोध प्रदर्शनों को भड़काने में किसकी भूमिका?

बांग्लादेशी खुफिया एजेंसियों की मानें तो बांग्लादेश की छात्र शाखा जमात-ए-इस्लामी और आईएसआई समर्थित इस्लामी छात्र शिविर यानी आईसीएस ने विरोध प्रदर्शनों को भड़काया। उन्होंने इस कदर कोहराम मचाया ताकि हसीना कुर्सी छोड़कर भाग जाएं जिससे पाकिस्तान और चीन के समर्थन वाली सरकार सत्ता में आए। भारत विरोधी रुख के लिए मशहूर जमात-ए-इस्लामी का उद्देश्य छात्र विरोध को राजनीतिक आंदोलन में बदलना था। खुफिया जानकारी से पता चलता है कि इस्लामी छात्र शिविर के सदस्यों ने कई महीनों तक सावधानी पूर्वक योजना बनाई थी। खुफिया सूत्रों ने बताया कि इस फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में सक्रिय चीनी संस्थाओं से आया है।

बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर गतिविधियों की जांच करने पर पता चला कि आवामी लीग के खिलाफ ज्यादातर पोस्ट, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा के वीडियो और शेख हसीना को बदनाम करने वाले पोस्टर, बीएनपी और उससे जुड़े अकाउंट्स द्वारा शेयर किए जा रहे थे। इनमें से ज्यादातर पोस्ट को अमेरिका स्थित अकाउंट्स द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा था।

 

तारिक रहमान…

तारिक रहमान बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में से एक हैं। वे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक प्रमुख हैं और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं।

 

निष्कर्ष:

बांग्लादेश तख्तापलट एक ऐसी घटना है, जिसमें देश के आंतरिक असंतोष और बड़ी भू-राजनीतिक ताकतों के हितों का मिश्रण दिखाई देता है। शेख हसीना के इस्तीफे ने बांग्लादेश को एक अनिश्चित दौर में ला खड़ा किया है, जहाँ बांग्लादेश सेना शासन के तहत गठित अंतरिम सरकार के सामने देश को राजनीतिक स्थिरता की ओर ले जाने की बड़ी चुनौती है।

 

 

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