languages-spoke-in-bihar-1753272150437

बिहार की धरती न केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध है, बल्कि भाषाई दृष्टिकोण से भी यह अत्यंत विविधतापूर्ण है। बिहार की बोलियाँ यहाँ के जनमानस की आत्मा हैं, जिनमें यहाँ की मिट्टी की सोंधी खुशबू और लोक-संस्कृति की मिठास घुली हुई है।

भाषाई आधार पर बिहार की प्रमुख बोलियों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों (बिहारी भाषाओं के समूह) में बाँटा जा सकता है: मगही, मैथिली और भोजपुरी। इनके अलावा अंगिका और वज्जिका जैसी महत्वपूर्ण बोलियाँ भी इस क्षेत्र की पहचान हैं।

 

१. मैथिली (Maithili)

मैथिली बिहार की एकमात्र ऐसी बोली है जिसे भारतीय संविधान की ८वीं अनुसूची में एक स्वतंत्र भाषा का दर्जा प्राप्त है।

 क्षेत्र: यह मुख्य रूप से उत्तर बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र (दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी) में बोली जाती है।

 विशेषता: इसकी अपनी प्राचीन लिपि है जिसे ‘तिरहुता’ या ‘मिथिलाक्षर’ कहा जाता है। मैथिली अपनी कोमलता और मिठास के लिए प्रसिद्ध है। महान कवि विद्यापति ने अपनी रचनाओं (पदावली) से इस भाषा को अमर बना दिया।

 

२. भोजपुरी (Bhojpuri)

भोजपुरी बिहार की सबसे अधिक बोली जाने वाली और वैश्विक स्तर पर पहचान रखने वाली बोली है।

 क्षेत्र: यह पश्चिमी बिहार (आरा, बक्सर, रोहतास, छपरा, सिवान, गोपालगंज) और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बोली जाती है।

 विशेषता: भोजपुरी अपनी जीवंतता और ‘ठसक’ के लिए जानी जाती है। भिखारी ठाकुर, जिन्हें ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ कहा जाता है, ने ‘बिदेसिया’ जैसी शैलियों के माध्यम से इस बोली को जन-जन तक पहुँचाया। आज भोजपुरी संगीत और सिनेमा का प्रभाव विदेशों (मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम) तक फैला हुआ है।

 

३. मगही (Magahi)

मगही शब्द ‘मागधी’ का अपभ्रंश है। यह प्राचीन मगध साम्राज्य की भाषा रही है।

 क्षेत्र: यह दक्षिण बिहार के क्षेत्रों (पटना, गया, नालंदा, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद) में बोली जाती है।

 विशेषता: मगही में एक प्रकार की स्पष्टता और लोक-संवाद की प्रखरता होती है। इसका लोक साहित्य अत्यंत समृद्ध है। प्राचीन काल में गौतम बुद्ध और महावीर के उपदेशों की मूल भाषा पाली/मागधी ही थी, जिससे मगही का सीधा संबंध है।

 

४. अंगिका (Angika)

 क्षेत्र: यह प्राचीन ‘अंग’ जनपद यानी भागलपुर, मुंगेर, बाँका और खगड़िया क्षेत्र की मुख्य बोली है।

 विशेषता: इसे मैथिली और बंगाली के बीच की एक कड़ी माना जाता है। अंगिका लोकगीतों और लोककथाओं का भंडार है।

 

५. वज्जिका (Vajjika)

 क्षेत्र: यह वैशाली, मुजफ्फरपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में बोली जाती है।

 विशेषता: यह मैथिली और मगही का मिश्रित रूप मानी जाती है, लेकिन इसकी अपनी एक विशिष्ट पहचान और उच्चारण शैली है।

 

सांस्कृतिक महत्व एवं वर्तमान स्थिति

बिहार की इन बोलियों के बीच एक भाषाई मानचित्र इस प्रकार देखा जा सकता है:

| बोली | मुख्य केंद्र | प्रमुख साहित्यिक विभूति |

|—|—|—|

| मैथिली | दरभंगा | विद्यापति |

| भोजपुरी | भोजपुर (आरा) | भिखारी ठाकुर |

| मगही | गया | सुरेश दुबे ‘सरस’ |

| अंगिका | भागलपुर | परशुराम ठाकुर ब्रह्मचारी |

 

निष्कर्ष

बिहार की बोलियाँ केवल संवाद का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यहाँ के लोगों की पहचान, गौरव और संस्कारों का प्रतिबिंब हैं। जहाँ मैथिली में विनय है, वहीं भोजपुरी में मस्ती और मगही में अधिकार भाव झलकता है। आज के वैश्वीकरण के दौर में इन बोलियों को सहेजना और इनके साहित्य को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि बिहार की यह अनमोल विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।

अगला कदम: क्या आप चाहते हैं कि मैं इनमें से किसी एक विशिष्ट बोली (जैसे मैथिली या भोजपुरी) के उद्भव और विकास पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करूँ? अगर कमेंट आए तो हम इस पर आलेख लाएंगे…

 

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *