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#UBIContest – 77
विषय : उड़ान संख्या २०२२
विधा : कविता
शीर्षक : हौसलों की उड़ान

हौसलों के धागों को
थाम अभी
कटी नहीं, ढील पड़ी है
पहचान अभी

उड़ान अभी बाकी है
आसमान अभी बाकी है
परिंदों को देख कर
अपने पर को खोल अभी

कब तक डरा रहेगा
जमीन पर पड़ा रहेगा
आसमान को देखने को
पैरों पर खड़ा हो जा अभी

सूरज को छूना है
चांद को अगर पाना है
आसमान छोटा करने को
हवा सा बन जा अभी

दुनिया पहचान मांगती है
वो सिर्फ उड़ान मांगती है
तेरा हर ख्वाब सच होगा
खुद पर भरोसा दिखा अभी

हौसलों के धागों को
थाम अभी
कटी नहीं, ढील पड़ी है
पहचान अभी

अश्विनी राय अरूण
बक्सर, बिहार

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