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साहित्यिक प्रतियोगिता : १.७
विषय : समय
दिनाँक : ०७/११/१९

समय का पहिया चलता जाए,
जैसे नदिया बहती जाए।
उस नदी के संग जो वह जाए,
समय उसी के संग हो जाए॥

समय का पहिया चलता जाए,
रात और दिन बदलता जाए।
जो रात दिन को एक कर जाए,
समय उसी के संग हो जाए॥

समय का पहिया चलता जाए,
जैसे हवा भी बहता जाए।
हवा को पकड़ जो पाए,
समय उसी के संग हो जाए॥

समय को समझ जो पाए,
आगे ही आगे वो बढ़ता जाय।
तोड़ पुरानी परम्परा को,
नई परम्परा वो गढ़ता जाय॥

मेहनत से जो ना घबराये,
राह तरक्की जोड़ता जाए।
समय का पहिया चलता जाए,
नई नई राहें बनती जाए॥

अश्विनी राय ‘अरूण’

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