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पंचतंत्र: नीतिशास्त्र और व्यवहार ज्ञान का विश्वकोश

 

प्रस्तावना

‘पंचतंत्र’ केवल कहानियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह मानव मनोविज्ञान, राजनीति और व्यवहार कुशलता का एक ऐसा व्यावहारिक ग्रंथ है, जिसे आज से लगभग दो हजार वर्ष पूर्व पंडित विष्णु शर्मा ने रचा था। विश्व साहित्य में ‘बाइबिल’ के बाद संभवतः यह सबसे अधिक अनुवादित होने वाली पुस्तक है। यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी ‘बुद्धि’ का प्रयोग कर कैसे विजय प्राप्त की जा सकती है।

 

रचना का उद्देश्य: मूर्ख राजकुमारों को विद्वान बनाना

पंचतंत्र के जन्म की कथा बड़ी रोचक है। दक्षिण भारत के ‘महिलाप्य’ नगर के राजा अमरशक्ति अपने तीन उद्दंड और मूर्ख पुत्रों (बहुशक्ति, उग्रशक्ति और अनंतशक्ति) के कारण अत्यंत चिंतित थे। तब अस्सी वर्ष के वृद्ध विद्वान पंडित विष्णु शर्मा ने यह चुनौती स्वीकार की कि वे मात्र छह महीने में उन राजकुमारों को नीतिशास्त्र में निपुण बना देंगे। उन्होंने राजकुमारों को शुष्क उपदेश देने के बजाय पशु-पक्षियों के माध्यम से कहानियाँ सुनाईं, जिन्हें आज हम ‘पंचतंत्र’ के नाम से जानते हैं।

 

पंचतंत्र की पाँच श्रेणियाँ (The Five Principles)

ग्रंथ का नाम ‘पंचतंत्र’ इसलिए पड़ा क्योंकि यह पाँच भागों या ‘तंत्रों’ में विभाजित है:

१. मित्रभेद (The Loss of Friends): इसमें बताया गया है कि कैसे स्वार्थी तत्वों के कारण दो अच्छे मित्रों (जैसे पिंगलक सिंह और संजीवक बैल) के बीच फूट डाली जा सकती है।

२. मित्रलाभ (Winning of Friends): यह भाग सिखाता है कि सच्चे मित्र बनाने के क्या लाभ हैं और एकता में कितनी शक्ति होती है (जैसे कौआ, चूहा, कछुआ और हिरण की मित्रता)।

३. काकोलूकीयम (Crows and Owls): यह युद्ध और शांति की नीति पर आधारित है। इसमें कौवों और उल्लुओं के माध्यम से शत्रु की चालों को समझने और ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति समझाई गई है।

४. लब्धप्रणाश (Loss of Gains): यह भाग सिखाता है कि हाथ में आई हुई वस्तु या अवसर को मूर्खता के कारण कैसे खो दिया जाता है (जैसे बंदर और मगरमच्छ की कहानी)।

५. अपरीक्षितकारकम् (Ill-Considered Action): यह भाग हमें बिना सोचे-समझे या बिना जांचे-परखे कोई भी कार्य न करने की चेतावनी देता है (जैसे नेवला और ब्राह्मण की पत्नी की कहानी)।

 

पंचतंत्र की वैश्विक यात्रा

पंचतंत्र की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्राचीन काल में ही इसका अनुवाद पहलवी (पुरानी ईरानी) भाषा में ‘कलीलाह व दिमनाह’ के नाम से हुआ था। इसके बाद यह अरबी, ग्रीक, लैटिन और यूरोपीय भाषाओं में पहुँचा। विश्व की लगभग ५० से अधिक भाषाओं में इसके २०० से अधिक संस्करण उपलब्ध हैं।

 

आज के युग में प्रासंगिकता (Management & Leadership)

आज के ‘कॉर्पोरेट’ और ‘मैनेजमेंट’ युग में पंचतंत्र की नीतियाँ ‘लीडरशिप क्वालिटी’ और ‘क्राइसिस मैनेजमेंट’ सीखने का सबसे अच्छा माध्यम हैं। यह सिखाता है कि:

* बल से बड़ी बुद्धि होती है।

* अपरिचित पर शीघ्र विश्वास नहीं करना चाहिए।

* संकट के समय धैर्य और चतुराई ही काम आती है।

 

पंडित विष्णु शर्मा: पंचतंत्र के रचयिता, जीवनी और चाणक्य से संबंध

 

 

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