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मां अन्नपूर्णा देवी शाकम्भरी के नाम से भी जाना जाता है। आदि नगरी काशी मे माँ जगदम्बा अन्नपूर्णा नाम से जानी जाती है। तो वहीं दूसरे छोर सहारनपुर मे शाकुम्भरी के नाम से प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इन्‍होंने स्‍वयं भगवान शिव को खाना खिलाया था।

मां अन्नपूर्णा मंदिर…

काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर मां अन्नपूर्णा का मंदिर है। इस मंदिर में माता अन्नपूर्णा की पूजा-उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि प्रतिदिन विधि पूर्वक मां अन्नपूर्णा की पूजा करने से गृह में विपरीत परिस्थिति में भी अन्न की कमी नहीं होती है। शास्त्रों में निहित है कि अन्न का सम्मान और ध्यान रखना चाहिए। भूलकर भी अन्न का अपमान नहीं करना चाहिए। साथ ही जितनी भूख हो, उतना ही भोजन परोसना चाहिए। कभी अन्न को फेंकना नहीं चाहिए। अन्न को बरबाद करने से मां अन्नपूर्णा रूष्ट हो जाती हैं। इससे घर की लक्ष्मी भी चली जाती है और घर में दरिद्रता का वास होने लगता है। इस मंदिर में कई अनुपम छवि हैं, जिनमें माता अन्नपूर्णा रसोई में हैं। वहीं, प्रांगण में कई प्रतिमाएं अवस्थित हैं। इनमें मां काली, पार्वती, शिवजी सहित कई अन्य देवी देवताएं हैं। हर वर्ष अन्नकूट उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर माता के दर्शन करते हैं। वहीं, रोजाना बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालु माता के दर्शन करने अवश्य आते हैं।

मां अन्नपूर्णा की कथा…

किसी समय की बात है, एक बार पृथ्वी पर अन्न की कमी हो गई। इससे पृथ्वी पर हाहाकार मच गया। उस समय पृथ्वी वासी ने त्रिदेव की उपासना कर उन्हें अन्न प्रलय की जानकारी दी। इसके पश्चात, आदिशक्ति मां पार्वती और भगवान शिव पृथ्वी लोक पर प्रकट हुए। प्रकृति की अनुपम रचना पर रहने वाले लोगों को दुखी देखकर मां पार्वती ने अन्नपूर्णा का स्वरूप ग्रहण कर भगवान् शिव को दान में अन्न दिया। वहीं, भगवान शिव ने अन्न को पृथ्वी वासियों में वितरित कर दिया। कालांतर में अन्न को कृषि में उपयोग किया। तब जाकर अन्न प्रलय समाप्त हुआ।

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