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कपाल मोचन तीर्थ काशी स्थित कज्जाकपुरा से पुराना पुल जाने वाले रास्ते पर है।

कथा…

कपाल मोचन तीर्थ की लीला भी अपरंपार है, जब काल भैरव भगवान ब्रह्मा जी का शीश लेकर युगों युगों तक घूमते रहे, भगवान शिव के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से काशी के उत्तर दिशा मे जाने के बाद उन्हें ब्रम्हा हत्या से मुक्ति मिला, इस दोरान भैरव काशी में प्रवेश किए तभी इस दौरान ब्रम्हा जी का शीश भैरव के हाथ से छूट कर जिस स्थान पर गिरा उस स्थान पर एक धारा कुंड कपाल मोचन तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

तीर्थ…

कपाल मोचन तीर्थ में लोग ब्रम्ह दोष से मुक्ति के लिए स्नान करने आते हैं, इस कपाल भैरव तीर्थ (मंदिर) के तीर्थ कूंड में स्नान करने से महिलाओं को बांझपन से मुक्ति मिलती है, चर्मरोग से भी निजात के लिए लोग इस कुंड का जल इस्तेमाल करते हैं, यहां स्नान करके लाट भैरव दर्शन-पूजन व दान करने से अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है, कपाल मोचन में पिंडदान और श्रद्धा की महिमा भी है, यहां गंगा स्नान, पूजा, जाप, हवन, चन्द्रयान व्रत का भी उल्लेख मिलता है।

वर्तमान…

यह कुंड अब बदहाल पड़ा है, पक्की सीढिया, घाटों के अलावा सुरक्षित दीवार वाले इस कुंड का जीर्णोद्धार १८वी शताब्दी में रानी भवानी ने कराया था, फिलहाल कपाल मोचन एवं लाट भैरव कुंड समिति की और से इसकी सफाई कराई जा रही है।

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