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सुशांत सिंह राजपूत मामला: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से लेकर कानूनी संघर्ष तक का पूरा घटनाक्रम

​भारतीय सिनेमा के उभरते सितारे सुशांत सिंह राजपूत की असामयिक मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में मुंबई पुलिस की जाँच, डॉक्टरों की रिपोर्ट और बिहार में दर्ज हुए मुकदमों ने एक लंबा कानूनी और सामाजिक विवाद खड़ा किया। आइए, इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य बिंदुओं पर एक नज़र डालते हैं।

 

​अंतिम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय

​मुंबई पुलिस को सुशांत सिंह राजपूत की विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त हो गई है, जिसे पांच डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम ने तैयार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स (इंडिया टुडे और एबीपी) के अनुसार:

​मृत्यु का कारण: रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण फाँसी के कारण दम घुटना (Asphyxia) बताया गया है।

​चोट के निशान: सुशांत के शरीर पर किसी भी प्रकार के संघर्ष या बाहरी चोट के कोई निशान नहीं पाए गए हैं।

​अन्य तथ्य: रिपोर्ट में उनके नाखूनों के साफ होने की बात भी कही गई है। डॉक्टरों की टीम ने इसे स्पष्ट रूप से आत्महत्या का मामला करार दिया है और किसी भी प्रकार की साजिश की संभावना से इनकार किया है।

 

मुंबई पुलिस की अब तक की कार्रवाई

​सुशांत के पार्थिव शरीर को पोस्टमॉर्टम के लिए मुंबई के कूपर अस्पताल भेजा गया था। जाँच के दौरान पुलिस ने अब तक कई महत्वपूर्ण बयान दर्ज किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

​उनकी कथित मित्र रिया चक्रवर्ती।

​सुशांत के पिता, बहनें और करीबी दोस्त।

​उनके घर पर काम करने वाले कर्मचारी और नौकर।

​फिल्म निर्देशक मुकेश छाबड़ा (जो सुशांत की अंतिम फिल्म ‘दिल बेचारा’ के निर्देशक हैं)।

 

​मुजफ्फरपुर में दर्ज कानूनी मामले

​इस मामले ने तब नया मोड़ लिया जब बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में फिल्मी हस्तियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए:

​पहला मामला: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने याचिका दायर की, जिसमें महेश भट्ट, मुकेश भट्ट, रिया चक्रवर्ती और कृति सैनन को आरोपी बनाया गया है।

दूसरा मामला: इससे पूर्व 17 जून को इसी अदालत में आदित्य चोपड़ा, साजिद नाडियाडवाला, संजय लीला भंसाली, एकता कपूर, दिनेश विजान, भूषण कुमार और सलमान खान के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में अभिनेत्री कंगना रनौत सहित अन्य को गवाह बनाया गया है। इन मामलों पर सुनवाई 3 जुलाई को निर्धारित की गई है।

 

सीबीआई जाँच की बढ़ती मांग

​जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने इस मामले की सीबीआई (CBI) जाँच की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

​उन्होंने सरकार को 8 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जल्द जाँच शुरू नहीं हुई, तो वे पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

​उन्होंने फिल्म जगत के कुछ प्रभावशाली परिवारों (जौहर, भट्ट, चोपड़ा और खान) पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हस्तक्षेप की अपील की है।

​साथ ही, उन्होंने बिहार में इन बैनरों की फिल्मों के बहिष्कार की चेतावनी भी दी है।

 

अश्विनी राय ‘अरुण’ की टिप्पणी

​”एक कलाकार का इस तरह जाना केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि उन अनगिनत सपनों की हत्या जैसा है जो छोटे शहरों से बड़े पर्दे की ओर बढ़ते हैं। सच क्या है, यह तो आने वाला समय और निष्पक्ष जाँच ही बताएगी, लेकिन इस घटना ने बॉलीवुड के भीतर की गुटबाजी और ‘नेपोटिज्म’ की बहस को हमेशा के लिए जिंदा कर दिया है।”

 

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