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ताजमहल का ऐतिहासिक सच (भाग-३): तहखाने के बंद २२ कमरों का रहस्य और एएसआई (ASI) की गुप्त तस्वीरें

(नोट: यह आलेख इस श्रृंखला का तीसरा भाग है। पहले भाग में हमने अदालती मुकदमों (२०००-२००२६) का विश्लेषण किया था और दूसरे भाग में शाहजहाँ के दरबारी ग्रंथ ‘बादशाहनामा’ के लिखित साक्ष्यों को समझा था। इस भाग में हम ताजमहल के सबसे रहस्यमयी और विवादित हिस्से—इसके नीचे बने बंद कमरों और वैज्ञानिक दावों पर चर्चा करेंगे।)
ताजमहल के मुख्य संगमरमर के चबूतरे के नीचे एक ऐसी दुनिया छिपी है, जो आम जनता और सैलानियों की नजरों से सदियों से दूर रखी गई है। हिंदू पक्षकारों और इतिहासकारों का दृढ़ विश्वास है कि यदि ताजमहल के इन बंद हिस्सों को खोलकर उनका वैज्ञानिक और पुरातात्विक सर्वेक्षण कराया जाए, तो वहां ‘तेजो महालय’ शिव मंदिर के अकाट्य प्रमाण, प्राचीन शिवलिंग और सनातन संस्कृति के शिलालेख प्राप्त होंगे।
आइए सिलसिलेवार तरीके से इन २२ बंद कमरों के रहस्य, एएसआई की कार्रवाई और इससे जुड़े वैज्ञानिक मतों को विस्तार से समझते हैं।

१. कहाँ हैं ये २२ कमरे और इनकी बनावट कैसी है?

ताजमहल का निर्माण केवल नदी के किनारे दिखने वाली मुख्य सफेद इमारत तक सीमित नहीं है। नदी की तरफ (यमुना नदी के तट की ओर) यदि आप ताजमहल को देखेंगे, तो संगमरमर के विशाल चबूतरे के नीचे लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) की एक विशाल दोमंजिला संरचना दिखाई देती है।
  • मेहराबदार रास्ते: नदी की तरफ से देखने पर इन कमरों के मेहराबदार (Arched) द्वार साफ दिखाई देते हैं, जिन्हें मुगलों के समय या बाद में ईंटों और चूने से स्थायी रूप से चुनवाकर (Plastered) बंद कर दिया गया था।
  • गुप्त सीढ़ियाँ: मुख्य मकबरे के अंदर, जहाँ मुमताज और शाहजहाँ की नकली कब्रें बनी हैं, वहाँ से नीचे की असली कब्रों की तरफ जाने वाली सीढ़ियों के पास ही कुछ गुप्त सीढ़ियाँ और रास्ते हैं, जो नीचे के इस विशाल तहखाने (Basement) की ओर जाते हैं। इन रास्तों पर एएसआई ने लोहे के भारी दरवाजे लगाकर ताला बंद कर रखा है।

          [ मुख्य संगमरमर का चबूतरा (दृश्य भाग) ]
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                              │ (गुप्त सीढ़ियाँ और लोहे के दरवाजे)
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          [ लाल बलुआ पत्थर का दोमंजिला तहखाना ]
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[बंद 22 कमरे (गंगाजल/नदी की ओर)]             [केंद्रीय गलियारा और मुख्य स्तंभ]
• दीवारों पर हिंदू नक्काशी के दावे।           • सुरक्षा और क्षरण (Corrosion) के 
• ईंटों से चुनवाकर बंद किए गए रास्ते।         कारण जनता के लिए पूर्णतः प्रतिबंधित।


२. इन कमरों को बंद रखने पर हिंदू पक्ष के गंभीर तर्क

इतिहासकार पी. एन. ओक और वर्तमान मामलों के हिंदू पक्षकारों (जैसे एडवोकेट हरिशंकर जैन) ने इन बंद कमरों को लेकर अदालतों में निम्नलिखित तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं:

क) लकड़ी के दरवाजों की कार्बन डेटिंग (१९७४ का सच)

हिंदू पक्ष के अनुसार, साल १९७४ में एक अमेरिकी शोधकर्ता प्रोफेसर मार्विन मिलर ने ताजमहल के यमुना नदी की ओर खुलने वाले इन तहखानों के एक पुराने लकड़ी के दरवाजे का एक छोटा सा टुकड़ा वैज्ञानिक जांच के लिए हासिल किया था।
जब न्यू यॉर्क की प्रयोगशाला में इसकी कार्बन डेटिंग (Carbon-14 Test) कराई गई, तो परिणाम चौंकाने वाले थे। उस रिपोर्ट के अनुसार, वह लकड़ी का टुकड़ा शाहजहाँ के काल (१६३२ ईस्वी) से लगभग ३०० वर्ष पुराना यानी १३वीं सदी के आसपास का था। इससे यह तर्क मजबूत हुआ कि शाहजहाँ ने केवल एक पुरानी हिंदू इमारत में मरम्मत और बदलाव कराए थे।

ख) शिव मंदिर के प्रतीकों को छिपाने का प्रयास

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन २२ कमरों की दीवारों पर भगवान शिव के प्रिय मांगलिक चिह्न जैसे त्रिशूल, कमल, नाग, और संस्कृत के श्लोक उत्कीर्ण थे। जब शाहजहाँ ने इसे मकबरे का रूप दिया, तो इन धार्मिक प्रतीकों को तोड़ना या हटाना पूरी तरह संभव नहीं था। इसलिए, विवाद और हिंदू विद्रोह से बचने के लिए इन पूरे कमरों को ही ईंट-पत्थरों की दीवारें खड़ी करके हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।

३. एएसआई (ASI) का पक्ष और मई २०२२ में जारी की गई तस्वीरें

साल २०२२ में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इन २२ कमरों को खोलने के लिए जनहित याचिका (PIL) दायर हुई, तो देश भर में इस रहस्य को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई। यद्यपि कोर्ट ने याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया कि यह शोध का विषय है, अदालत का नहीं; लेकिन बढ़ते सार्वजनिक दबाव के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को एक बड़ा कदम उठाना पड़ा।

एएसआई द्वारा जारी की गई गुप्त तस्वीरें

मई २०२२ में एएसआई ने अपनी आधिकारिक पत्रिका (Newsletter) में इन बंद कमरों के भीतर चल रहे संरक्षण कार्य (Restoration Work) की कुछ तस्वीरें सार्वजनिक कीं।
  • तस्वीरों में क्या दिखा?: तस्वीरों में एएसआई के कारीगर इन भूमिगत कमरों की दीवारों पर चूने का प्लास्टर (Lime plaster) बदलते और मरम्मत करते नजर आ रहे थे। इन कमरों की बनावट लंबी दीर्घाओं (Corridors) और छोटे कक्षों जैसी है।
  • एएसआई का दावा: एएसआई ने स्पष्ट किया कि ये कमरे पूरी तरह से गुप्त नहीं हैं और पुरातत्वविद समय-समय पर इनकी सुरक्षा और मजबूती की जांच के लिए अंदर जाते हैं। एएसआई के अनुसार, वहां कोई मूर्ति या शिवलिंग नहीं है; ये केवल इमारत के निचले हिस्से को नदी के पानी के दबाव से बचाने और संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए खोखले स्थापत्य (Structural Vaults) हैं।
  • हिंदू पक्ष का प्रति-तर्क: हिंदू पक्षकारों ने एएसआई की इन तस्वीरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुरातत्व विभाग ने केवल उन्हीं हिस्सों की तस्वीरें दिखाईं जिन्हें पहले ही साफ या री-प्लास्टर किया जा चुका था। जो मुख्य हिस्से ईंटों की मोटी दीवारों के पीछे आज भी पूरी तरह बंद हैं, उन्हें कैमरे के सामने क्यों नहीं लाया गया?


४. वैज्ञानिक और संरचनात्मक (Structural) कारण

मुख्यधारा के इंजीनियरों और आर्किटेक्ट्स का मानना है कि ताजमहल जैसी भारी-भरकम संगमरमर की इमारत को यमुना नदी की गीली मिट्टी पर टिकाए रखने के लिए एक विशेष ‘फाउंडेशन’ (नींव) की आवश्यकता थी।
  • आबनूस (Ebony) की लकड़ी के कुएं: ताजमहल की नींव में आबनूस और महोगनी की लकड़ी के विशाल कुएं बनाए गए हैं, जिन्हें नमी की आवश्यकता होती है।
  • तापमान का संतुलन: निचले तहखाने के ये २२ कमरे मुख्य इमारत के तापमान को नियंत्रित रखने और हवा के दबाव को बांटने का काम करते हैं। यदि इन कमरों को आम जनता के लिए खोल दिया जाए, तो हजारों सैलानियों की सांसों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड और नमी (Humidity) से इस प्राचीन नींव और संगमरमर को अपूरणीय क्षति (Structural Damage) हो सकती है।


निष्कर्ष: क्या छुपा है इन बंद पर्दों के पीछे?

ताजमहल के ये २२ बंद कमरे आज भी विज्ञान, इतिहास और आस्था के बीच एक अनसुलझी पहेली बने हुए हैं। जहाँ एएसआई इसे केवल एक इंजीनियरिंग संरचना और मकबरे का आधार मानता है, वहीं करोड़ों हिंदुओं की आस्था इसे ‘भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव’ का गर्भगृह मानती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जुलाई २०२६ में सरकार और एएसआई को जारी किए गए नए नोटिस के बाद, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या भविष्य में इन कमरों का आधुनिक जीपीआर (Ground Penetrating Radar) सर्वे करने की अनुमति मिलती है या नहीं।

अगले भाग की ओर:
इस श्रृंखला के अगले और अंतिम भाग में हम चर्चा करेंगे—“ताजमहल के शीर्ष पर स्थित कलश का त्रिशूल आकार, मुख्य गुंबद का स्थापत्य और इस विवाद का अंतिम कानूनी व सामाजिक समाधान क्या हो सकता है?”

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