जब मैं छोटा था…
चलिए चलते हैं बचपन के किस्से में,
बड़े-बड़े दर्द के उस छोटे-से हिस्से में,
खेला करते थे हम क्रिकेट चंदे के पैसे में।
किसी के हिस्से ओपनिंग आई थी,
तो किसी के हिस्से कीपिंग आई थी।
जिसने दिया था ज़्यादा हिस्सा,
उसके हिस्से में कैप्टेंसी आई थी।
कोई बॉल लिए खड़ा था,
रनअप के लिए कोई अड़ा था।
हाय! मैं मोहल्ले की टीम में
सबसे छोटा था,
मेरे हिस्से में कॉमन फील्डिंग
और नाली की गेंद आई थी।
जनाब, आप ही फैसला करें,
क्या यह दर्द बाकियों से छोटा था?
जब मैं छोटा था॥
— अश्विनी राय ‘अरुण’
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