प्रगतिशील साहित्य का सच

धर्मवीर भारती का ‘अंधा युग’: महाभारत का पुनर्मूल्यांकन या सनातन दर्शन का निराशावादी विकृतीकरण?...
अज्ञेय का ‘शेखर: एक जीवनी’: ‘व्यक्ति-स्वातंत्र्य’ का सौंदर्य या अनैतिकता और उग्र-अहंकार का उदात्तीकरण?...
कमलेश्वर का ‘कितने पाकिस्तान’: वैश्विक शांति का महाकाव्य या इस्लामी कट्टरवाद का छद्म-सेक्युलर बचाव?...
राहुल सांकृत्यायन का ‘वोल्गा से गंगा’: भारतीय इतिहास की खोज या सनातन संस्कृति के...
मुक्तिबोध की कविता ‘अंधेरे में’: आत्म-खोज का काव्य या बौद्धिक अराजकता और कुंठा का...
फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ का ‘मैला आँचल’: लोक-संस्कृति की सोंधी महक या सनातन संस्थाओं पर...
यशपाल का ‘झूठा सच’: विभाजन की प्रामाणिक त्रासदी या ऐतिहासिक तथ्यों की वामपंथी लीपापोती?...
यशपाल का उपन्यास ‘दिव्या’: स्त्री-मुक्ति का आवरण या सनातन परंपरा पर योजनाबद्ध आघात?  ...