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आज हम बात करने वाले हैं, एक ऐसे साहित्यकार एवम पत्रकार के बारे में, जिन्होंने ‘हनुमत चरित’ पर सर्वप्रथम मौलिक कृति की रचना की थी तथा ‘कालिदास ग्रंथावली’ जिनका अनूठा एवं साहसिक प्रयास था। वे ‘सनातन धर्म’ के संपादक एवं महामना मदनमोहन मालवीय जी के निजी सचिव भी रहे थे।

परिचय…

पंडित सीताराम चतुर्वेदी का जन्म २७ जनवरी, १९०७ को वाराणसी के छोटी पियरी में हुआ था। इनके पिताजी पंडित भीमसेन चतुर्वेदी जी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राच्य विद्या एवं पौरोहित्य विभाग के अध्यक्ष थे। सीताराम जी ने मुजफ्फरनगर से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हिन्दी, संस्कृत, पालि तथा प्राचीन भारतीय इतिहास एवं संस्कृति में स्नातकोत्तर तथा बी.टी., एल.एल.बी., साहित्याचार्य की उपाधि प्राप्त की। इतना ही नहीं वे हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेज़ी, उर्दू, फ़ारसी, पालि, प्राकृत तथा अपभ्रंश भाषा एवं ब्राह्मी, खरोष्ठी आदि प्राचीन भारतीय लिपियों के भी ज्ञाता थे।

कार्य…

सीताराम जी ने सेन्ट्रल हिन्दू स्कूल तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में वर्ष १९३२-१९३८ तक अध्यापन कार्य करने के साथ ही साथ प्राध्यापक भी रहे। इसके अलावा उन्होंने अन्य प्रतिष्ठानों में अपना योगदान दिया, जैसे; भगवानदीन साहित्य विद्यालय, काशी के आचार्य, टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, काशी के संस्थापक अध्यक्ष, सतीशचन्द्र कॉलेज, बलिया के प्राचार्य, टाउन डिग्री कॉलेज, बलिया के प्राचार्य तथा बिनानी विद्या मन्दिर, कलकत्ता के निदेशक भी रहे थे।

संपादन व लेखन कार्य…

पण्डित सीताराम चतुर्वेदी जी ने वर्ष १९२७-२८ में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्रकाशित होने वाले ‘डॉन’ अंग्रेज़ी पत्र का संपादन भी किया था। इसके पश्चात् वर्ष १९३०-३२ में भूमिगत समाचार पत्र रणभेरी, शंखनाद का संपादन व लेखन तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्रकाशित साप्ताहिक सनातन धर्म का संपादन किया। वर्ष १९४७-४९ तक बम्बई से भारत विद्या, वर्ष १९४८ में प्रतिभा (मासिक), वर्ष १९४९ में संग्राम (साप्ताहिक) एवं १९५५-५९ में काशी से मासिक पत्र वासंती तथा वर्ष १९६२-६३ में कलकत्ता के संकल्प का संपादन किया।

कृतियाँ…

चतुर्वेदी जी ने शिक्षा, साहित्य, दर्शन, इतिहास, योग, राजनीति आदि लगभग सभी क्षेत्रों में २१४ ग्रंथ एवं ८५ नाटक-नाटिकाओं का लेखन व मंचन किया। प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार हैं :

१. मालवीय जीवन चरित

२. अभिनव नाट्य शास्त्र

३. समीक्षा शास्त्र

४. साहित्यानुशासन

५. तन्त्र विज्ञान और साधना

६. भारतीय और पाश्चात्य रंगमंच

७. कालिदास ग्रन्थावली (सटीक)

८. तुलसी ग्रन्थावली (टीका सहित)

९. सूर ग्रन्थावली (सटीक)

१०. वाल्मीकीय रामायण (सटीक)

‘ठेठ टकसाली नागरी’ के एकमात्र लेखक पण्डित सीताराम चतुर्वेदी जी ने हिन्दी साहित्य के एकमात्र चम्पू ‘श्रीराम विजय’ की रचना की।

१७ फरवरी, २००५ को बरेली के निकट भगवान के धाम जाने से पूर्व पण्डित सीताराम चतुर्वेदी जी को अनेक पुरस्कार व सम्मान से सम्मानित किया गया था, जिनमें…

१. वर्ष १९९९ में उत्तरप्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा ‘हिन्दी गौरव’ सम्मान।

२. वर्ष २००३ हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा ‘साहित्य वाचस्पति’ सम्मान।

३. वर्ष २००३ में हिन्दी गौरव तथा कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा डी.लिट् की उपाधि मुख्य हैं।

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