April 6, 2025

“द कश्मीर फाइल्स” देखने के बाद एक महिला रोते हुए विवेक अग्निहोत्री से कहती है, ”हमारे साथ जो कुछ हुआ, आपके अलावा ये मूवी कोई और नहीं कर सकता था। आप हमारे लिए भगवान हैं।” बातचीत के दौरान फिल्म के एक कलाकार दर्शन कुमार भी वहां पहुंच जाते हैं। उन्हें देखकर महिला दर्शन कुमार को भी गले से लगा लेती है और उन्हें बड़े ही भावुक होकर आशीर्वाद देती है तथा पूरी टीम के बेहतर भविष्य की कामना भी करती है। इसी वीडियो को दर्शन ने शेयर करते हुए लिखा- ”जो दिल से आता है वही दिल को छूता है। कश्मीर फाइल्स अब आप लोगों की फिल्म है।’

परिचय…

पत्रकारों के यह पूछने पर कि “द कश्मीर फाइल्स” के स्टार कास्ट को आपने अपने शो पर क्यूं नहीं बुलाया? इस पर कपिल शर्मा ने सीधे तौर पर कहा कि इसमें कोई बड़ा स्टार नहीं है। मगर हम बताते हैं कि इस फिल्म में कौन कौन है, बस तय आप को करना है कि वो बड़ा स्टार है या… अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, दर्शन कुमार, चिन्मय मंडलेकर, पुनीत इस्सर, मृणाल कुलकर्णी आदि।

विडंबना के साथ “द कश्मिर फाइल्स (The Kashmir Files)” शुक्रवार को कुछ गिने चुने सिनेमाघरों में रिलीज हुई, क्योंकि यह फिल्म एक सच्ची त्रासदी पर आधारित है। जिसे देखकर हर कोई अंदर तक हिल जाएगा। यह फिल्म वर्ष १९९० में कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा को दिखाती है, जिन्हें आतंकियों द्वारा अपने घरों से भागने के लिए मजबूर कर किया दिया था। फिल्म यह भी बताती है कि वो सिर्फ एक पलायन नहीं बल्कि नरसंहार था। फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री हैं, जो फिल्म के माध्यम से कश्मीरी पंडितों की पीड़ा और आवाज को सामने लेकर आए हैं। उन्होंने फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की है कि कैसे राजनीतिक कारणों से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को वर्षों तक दबा कर रखा गया।

कहानी…

फिल्म की कहानी वर्ष १९९० से शुरू होती है और मौजूदा वर्ष तक आती है। दिल्ली में पढ़ रहा कृष्णा (दर्शन कुमार) अपने दादाजी पुष्कर नाथ पंडित (अनुपम खेर) की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए श्रीनगर आता है। कश्मीर के अतीत के बारे में वह कुछ भी नहीं जानता, बस वह अपने परिवार से जुड़ी सच्चाई की खोज में लग जाता है। यहां आते ही उसकी मुलाकात दादाजी के चार दोस्तों से होती है। उनके बीच धीरे धीरे कश्मीरी पंडितों के पलायन और नरसंहार की चर्चा शुरू होती है और कहानी पहुंचती बीते दर्दनाक वर्ष १९९० में… कश्मीर की गलियों में आतंकी बंदूकें लेकर घूम हैं और कश्मीरी पंडितों को ढूंढ-ढूंढकर मार रहे हैं। फिल्म कश्मीरी पंडितों पर हुए तमाम हिंसा और अत्याचार को दिखाती है। इसमें राज्य के अपंग प्रशासन के सामने सभी असहाय हैं।

अभिनय…

कहानी के साथ ही इस फिल्म के कलाकारों ने भी इस फिल्म को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। वैसे तो ‘द लीजेंड अनुपम खेर’ ने कई बार अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है, लेकिन इस फिल्म में उन्होंने पुष्कर नाथ पंडित के किरदार को ऐसे निभाया है कि दर्शकउन्हें निहारते रह जाएंगे, उन्होंने एक बार फिर से ये साबित किया कि वह फिल्म इंडस्ट्री के सबसे शानदार वर्सेटाइल एक्टर हैं। वहीं, ‘द ग्रेट मिथुन दा (चक्रवर्ती)’ ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। एक छात्र नेता के तौर पर दर्शन कुमार ने एक बार फिर से अपने प्रभावी अभिनय का प्रदर्शन किया है। और अगर पल्लवी जोशी की बात करें तो विवेक अग्निहोत्री की पिछली फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला था और एक बार फिर से उन्होंने साबित कर दिया है कि वह इस बार भी ‘द कश्मीर फाइल्स’ के माध्यम से इस पुरस्कार की मजबूत दावेदार हैं। यहां पर चिन्मय मांडलेकर की एक्टिंग की भी तारीफ करना चाहेंगे, जिन्होंने फारुक अहमद के तौर पर स्क्रीन पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। इनके अलावा बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है, जैसे प्रकाश बेलावड़ी, पुनीत इस्सर ( महाभारत के दुर्योधन), अतुल श्रीवास्तव, भाषा सुंबली आदि।

मेरी नजर से…

विवेक अग्निहोत्री ने वर्षों तक इस फिल्म को बनाने के लिए रिसर्च किया है, जो स्क्रीन पर साफ साफ देखा जा सकता है। उन्होंने इस फिल्म में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और नरसंहार से संबंधित कई मुद्दे उठाए हैं। परंतु वे मात्र तीन किरदारों के जरीए ही कश्मीरी पंडितों की पीड़ा दिखाने की कोशिश में रह गए और बाकी के किरदार एकदम से पीछे छूट गए। फिल्म में कई सारे मुद्दे एक के बाद एक सामने आते हैं जिसकी वजह से इसके कुछ किरदारों को छोड़कर किसी से खास जुड़ने का मौका नहीं मिल पाता। दूसरी बात इस फिल्म में दिखाई गई कहनी १९९० से शुरू होती है, जबकि कश्मीर के हिंदुओं के नरसंहार की कहानी १४वीं शताब्दी से शुरू होकर आजादी के बाद तक चली आ रही थी, जिसकी पूर्णाहुति वर्ष १९९० थी।

और अंत में…

यह फिल्म कमजोर दिल वालों के लिए नहीं बना है, क्योंकि फिल्म में कई ऐसे सीन हैं, जिन्हें देखकर आप अपनी आंखें बंद कर सकते हैं। खैर, फिल्म बेहतरीन बनी है, इसे आपको एक बार जरूर देखना चाहिए, क्योंकि यह वह फिल्म है जो बॉलीवुड के ओरिजिनल कहानी और कंटेंट ना दिखाने वाली कालिख को धो सकता है। और अफसोस की बात यह है कि जिसे बॉलीवुड धोना ही नहीं चाहता।

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