मेरे बच्चे! तुम जब बड़े हो जाना… मेरे बच्चे! तुम जब बड़े हो...
कविता
मौलिक हिंदी कविताओं का विशाल संग्रह: सामाजिक, आध्यात्मिक और विचारोत्तेजक
“हमारे ‘कविता’ अनुभाग में आपका स्वागत है! यहाँ आपको विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण द्वारा रचित सभी मौलिक हिंदी कविताएँ मिलेंगी। इस संग्रह में ‘मोबाइल का नशा’ और ‘मानवता के द्रोही’ जैसी महत्वपूर्ण रचनाएँ शामिल हैं, जो सामाजिक समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। हिंदी कविता के इस अद्भुत संसार में गोता लगाएँ।”
विद्यावाचस्पति अश्विनी राय अरुण कहते हैं, ‘कुछ ना कहकर सब कुछ कह जाने की कला ही कविता है’
सोने के लिए जागना घर की उस मद्धम अटारी पर, कथा-किताबें मौन भरी हैं;...
UBI साप्ताहिक कविता प्रतियोगिता #०३ दिनांक : ०४-११-१८ मेरी खा़बे-कायनात उसे देखा...
UBI साप्ताहिक कविता प्रतियोगिता # ५ दिनांक – १८-१२-१८ विषय – रिश्ते बदलते...
काफिला और शून्य वह टकटकी लगाए देखता रहा, वीआईपी को तो कभी खुद...
हिसाब ‘राम-भरोसे’ अयोध्या है प्रभु राम की, और मंदिर भी उन्हीं का है।...
महादेव! मेरा जीतना ज़रूरी है मुझे हारने मत देना महादेव, मेरा जीतना बहुत...
वह और मैं: एक संवाद मित्र का प्रश्न: “सुना है बड़े मशहूर हो...
असली वसीयत: वो ‘आवारा’ दोस्त महफ़िल सजी थी, दावत हुई, फिर सब विदा...
शीर्षक: मेरा घर कहाँ है? बचपन की देहरी पर खड़ी, जब माँ से...