महादेव! मेरा जीतना ज़रूरी है
मुझे हारने मत देना महादेव,
मेरा जीतना बहुत ज़रूरी है।
अकेले ही चल पड़ा हूँ जिस रास्ते पर,
मेरा मंज़िल तक पहुँचना बहुत ज़रूरी है॥
यहाँ सब खड़े हैं बस यह देखने को,
कि मैं कब थकूँगा, मैं कब हारूँगा?
पर मैं यह जानता हूँ कि टूटकर भी,
मैं आपके ही नाम से खुद को सँवारूँगा।
दुनिया की नज़रों में जो मेरी लाचारी है,
आपके चरणों में वही मेरी साख पूरी है,
मुझे हारने मत देना महादेव,
मेरा जीतना बहुत ज़रूरी है॥
राह के शूल भी अब तो स्वीकार हैं,
जब संग मेरे त्रिशूल धारी सरकार हैं।
लोग हँसते हैं मेरे अकेलेपन पर यहाँ,
पर उन्हें क्या पता, मेरे साथ तो पूरा ब्रह्मांड है जहाँ!
अब तो साँसों की
यह डोरी भी आपके ही नाम है,
इस जग के काँटों के बीच,
आपका साया ही विश्राम है।
ज़माने की ये दीवारें अब मुझे रोक न पाएँगी,
आपकी भस्म ही अब मेरा श्रृंगार और सूरी है,
मुझे हारने मत देना महादेव,
मेरा जीतना बहुत ज़रूरी है॥
माना कि इम्तिहान कड़ा है इस मोड़ पर,
पर मैं भी अड़ा हूँ सब कुछ आप पर छोड़कर।
वे ताने कसेंगे, वे जाल बिछाएँगे,
पर डमरू की थाप पर मेरे सब कष्ट मिट जाएँगे।
मेरी इस ख़ामोश लड़ाई का
साक्षी बस तू ही है,
जहाँ सबने साथ छोड़ा,
वहाँ मेरा आसरा बस तू ही है।
अब तो डगर की हर मुश्किल को मंज़ूरी है,
क्योंकि महाकाल! मेरी जीत में ही आपकी कीर्ति पूरी है,
मुझे हारने मत देना महादेव,
मेरा जीतना बहुत ज़रूरी है॥