वो आ जाए तो नज़्म मुकम्मल हो जाए ज़मीं पे चाँद उतरा है,...
अश्विनी राय अरुण की कविता
पास बैठे हैं सब, पर कोई पास नहीं, धड़कनों में अब पहले जैसी प्यास...
भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी, बक्सर की इस पावन रज पर, छटा अलौकिक...
न जाने वो कहाँ चली गयी बिन उसके जीवन सजा हो गयी ...
यदि दुनिया गुलाबी होती, तो जगत सजीवन होता। मानव सादगी से भरे होते,...