UBI contest ९८
ब्लैकबोर्ड सी जिंदगी
रचयिता: विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’
श्यामपट्ट सी श्वेत-श्याम है, यह अपनी तक़दीर,
पल में साफ़-सफ़ाफ़ है, पल में धुंधली तस्वीर।
कभी लिखा जो इस पर होता, मन को बहुत लुभाता है,
कभी यही झलकाकर दर्पण, कमियाँ हमें दिखाता है।
देख कठिन प्रश्नों को कोई, अपना मुख छिपाता है,
कोई शौर्य दिखाने को, नाम सरेआम लिखाता है।
कभी चित्र उकेरे जाते, कभी रफ़ सा मिट जाता है,
कभी सज़ायाफ़्ता का इस पर, नाम लिखा पाया जाता है।
चाक से जो कुछ लिखा गया है, उसकी उम्र बस चंद पल है,
पर जो उतरा नोटबुक पर, उसका जीवन ही जीवन है।
विद्यालय का यह ब्लैकबोर्ड, मंदिर की मूरत जैसा है,
स्वयं मूक-सा दिखता लेकिन, दिखाता जग सारा कैसा है!
