महादेव! मेरा जीतना ज़रूरी है मुझे हारने मत देना महादेव, मेरा जीतना बहुत...
अश्विनी राय अरुण की कविता
वो आ जाए तो नज़्म मुकम्मल हो जाए ज़मीं पे चाँद उतरा है,...
पास बैठे हैं सब, पर कोई पास नहीं, धड़कनों में अब पहले जैसी प्यास...
भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी, बक्सर की इस पावन रज पर, छटा अलौकिक...
न जाने वो कहाँ चली गयी बिन उसके जीवन सजा हो गयी ...
यदि दुनिया गुलाबी होती, तो जगत सजीवन होता। मानव सादगी से भरे होते,...
कृतज्ञता के स्वर मैं सर्वप्रथम व्यक्त करता हूँ आभार, आदरणीय श्री महेश जी...
रास्ते और राही: जीवन की यात्रा और दार्शनिक अंतर्द्वंद्व पर एक मर्मस्पर्शी कविता | अश्विनी राय ‘अरुण’
रास्ते और राही जहाँ से मैं आ रहा हूँ, वहाँ वापस जाना नहीं...
UBI contest ९८ ब्लैकबोर्ड सी जिंदगी रचयिता: विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’ श्यामपट्ट सी...
अमिट स्मृतियाँ अलविदा कह कर भला, क्या चले जाते हैं लोग? मैंने तो...