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यदि दुनिया गुलाबी होती,

तो जगत सजीवन होता।

 

मानव सादगी से भरे होते,

सौहार्दपूर्ण जीवन जीते।

 

प्रेम, समरसता और भाईचारे,

पीढ़ियों को विरासत में मिलते।

 

प्रकृति का हर एक दृश्य मानो,

चित्रकार की कलाकृति जान पड़ती।

 

ध्वनि संसार के अति विलक्षण संगीत,

स्वर्गीय आनंद की अनुभूति कराते।

 

यदि दुनिया गुलाबी होती, तो

दिलों में प्रेम का उत्कर्ष होता।

 

द्वेष, विवाद, झूठ आदि जैसे

शब्द हमने कभी सुने ही ना होते

 

गुलाबी दुनिया स्वर्ग समान होती,

जहां प्रेम, शांति और विश्वास का राज होता।

 

विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’

बक्सर (बिहार)

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