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द गॉडफादर: सत्ता, परिवार और अपराध की कहानी

 

वर्ष १९७२ में अमेरिकी थ्रिलर फिल्म आई थी, द गॉडफ़ादर। यह फिल्म मारियो प्युज़ो के उपन्यास द गॉडफ़ादर पर आधारित थी। इस फिल्म की कहानी वर्ष १९४५ से वर्ष १९५५ तक के दस वर्षों की अवधि में फैली है जो काल्पनिक इतालवी अमेरिकी अपराधी परिवार कोरलियॉन का इतिवृत्त दर्शाती है। इस फिल्म की सफलता के बाद इसके दो रीमेक भी बने। वर्ष १९७४ में गॉडफ़ादर भाग II और वर्ष १९९० में गॉडफादर भाग III।

 

 

डॉन कॉर्लियोन: सत्ता, परिवार और अपराध की कहानी का सारांश

 

द गॉडफादर की कहानी १९४० के दशक के न्यूयॉर्क शहर में स्थापित है और यह कोर्र्लियोने परिवार (Corleone Family) नामक शक्तिशाली इतालवी-अमेरिकी माफिया परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है।

 

 

मुख्य बिंदु

 

डॉन वीटो कॉर्लियोने: कहानी के केंद्र में परिवार के मुखिया, डॉन वीटो कॉर्लियोने (Vito Corleone) हैं, जिन्हें समुदाय में द गॉडफादर के नाम से जाना जाता है। वह न्याय और सुरक्षा के बदले में लोगों से वफादारी लेते हैं।

बेटों की भूमिका: फिल्म की शुरुआत डॉन वीटो की बेटी की शादी से होती है, जिसके बाद उनके आपराधिक साम्राज्य में उठापटक शुरू होती है। उनके तीन बेटे हैं—सन्नी (Sonny), फ्रेडो (Fredo), और सबसे छोटा, लेकिन युद्ध का नायक माइकल (Michael), जो पहले परिवार के गैर-कानूनी व्यवसाय से दूर रहना चाहता है।

टकराव और हत्या: जब डॉन वीटो ने ड्रग्स के व्यापार में शामिल होने से इनकार कर दिया, तो प्रतिद्वंद्वी माफिया परिवारों ने उन पर घातक हमला करवाया। इस हमले के बाद, माइकल को न चाहते हुए भी परिवार के मामलों में गहराई से उतरना पड़ता है।

माइकल का परिवर्तन: कहानी का मुख्य आर्क माइकल कॉर्लियोने का एक सम्मानित पूर्व-सैनिक से एक निर्दयी और चालाक माफिया बॉस में परिवर्तन है। वह अपने परिवार के दुश्मनों से बदला लेने और अपने पिता की विरासत को बचाने का कठिन निर्णय लेता है।

यह कहानी केवल अपराध की नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे परिवार की रक्षा के नाम पर अहिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए मजबूर होने पर माइकल अंततः अपने पिता से भी अधिक कठोर और शक्तिशाली ‘गॉडफादर’ बन जाता है।

 

 

भूमिका…

 

निर्माता: अल्बर्ट एस रडी

निर्देशक: फ़्रांसिस फ़ोर्ड कॉपोला

उपन्यास: मारियो पुज़ो

पटकथा लेखक: मारियो पुज़ो, फ़्रांसिस फ़ोर्ड कॉपोला, रॉबर्ट टाउनेल।

अभिनेता: मार्लन ब्रैंडो, अल पचीनो, जेम्स कान, रॉबर्ट डुवाल, रिचर्ड एस कास्टेलानो, अबे विगोडा, स्टेर्लिंग हेडन, डाएन कीटन, तालिया शायर, जॉन कैज़ाले, जॉन मार्ली, रिचर्ड कोंटे, जियानी रुसो, अल लेटिएरी

छायाकार: गोर्डन विलिस

संपादक: विलियम एच रेनोल्ड्स, पीटर ज़िनर

संगीतकार: नीनो रोटा, कार्माइन कॉपोला

वितरक: पैरामाउंट पिक्चर

प्रदर्शन तिथि: १५ मार्च, १९७२

लम्बाई: १७७ मिनट

लागत: $६५,००,०००

कुल कारोबार: $१३,३६,९८,९२१

 

 

क्यों है द गॉडफादर सिनेमाई इतिहास की एक मास्टरपीस?

 

द गॉडफ़ादर एक ऐसा नाम है जो सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक युग बन चुका है। इसे फ्रांसिस फोर्ड कोपोला ने डायरेक्ट किया था और ये मारियो पूज़ो की वर्ष १९६९ में आई उपन्यास पर आधारित है, परन्तु कहानी वहीं से शुरू नहीं होती, जो उपन्यास में है। असल में जब मारियो पूज़ो ने ये किताब लिखी, तो वह खुद आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। उन्होंने ये उपन्यास पैसे कमाने के लिए लिखी थी और जब इसकी बिक्री आसमान छूने लगी तो पैरामाउंट पिक्चर्स ने फिल्म बनाने का फैसला किया।

पैरामाउंट पहले तो किसी बड़े नाम को निर्देशक बनाना चाहता था, पर किसी ने खास इंटरेस्ट नहीं दिखाया। तब कोपोला, जो स्थापित निर्देशक नहीं थे, को उन्हें साइन किया गया। कोपोला खुद इस कहानी को बहुत गहराई से देख रहे थे, उनके लिए यह उपन्यास सिर्फ माफिया की कहानी नहीं थी, यह एक परिवार की, प्रवासन की, ताकत और त्रासदी अर्थात दुखद घटना पर आधारित कहानी थी। वैसे तो स्टूडियो चाहता था कि फिल्म सिर्फ एक माफिया ड्रामा बने, लेकिन कोपोला इसे कुछ और बनाने की इच्छा रखते थे। उन्होंने इस कहानी को एक परिवार की दुखद कथा में बदल दिया।

 

अभिनय का शिखर: मार्लन ब्रैंडो और अल पचिनो

जब कलाकारों के साइन की बारी आई, तो सबसे बड़ा विवाद मार्लन ब्रैंडो को लेकर हुआ। स्टूडियो नहीं चाहता था कि उन्हें लिया जाए। ब्रैंडो उस वक्त एक कठिन एक्टर माने जाते थे और उनकी फिल्में भी कोई कमाई नहीं कर रही थी। परन्तु कोपोला को उनमें डॉन वीटो कोरलियॉन साफ दिख रहा था। उन्होंने स्टूडियो को मनाया, और ब्रैंडो का एक टेस्ट वीडियो भेजा जिसमें उन्होंने रुई अपने गालों में भरकर डॉन कोरलियॉन का लुक अपनाया हुआ था। उस वीडियो को देखकर सब चौंक गए। और फिर तय हुआ कि डॉन कोरलियॉन का रोल कोई और नहीं, अब सिर्फ ब्रैंडो ही करेंगे।

अल पचीनो का रोल भी आसान नहीं था। पैरामाउंट नहीं चाहता था कि इतना कम जाना-पहचाना एक्टर माइकल कोरलियॉन जैसा मुख्य किरदार निभाए। पर कोपोला इस बार फिर अड़ गए। उन्होंने पचीनो के ऑडिशन करवाए, बार-बार करवाए, और आखिरकार वही हुआ जो कोपोला चाहते थे। पचीनो ने माइकल के ट्रांसफॉर्मेशन को इतने गहराई से निभाया कि आज तक वो किरदार सिनेमा का हिस्सा बन गया है, जिसे चाह कर भी अलग नहीं किया जा सकता।

 

निर्देशन और सिनेमैटोग्राफी

शूटिंग के दौरान कई समस्याएं आईं। न्यू यॉर्क में शूटिंग करते वक्त माफिया के असली लोग फिल्म से नाराज़ थे। उन्होंने “माफिया” को शब्द स्क्रिप्ट से हटाने की मांग रखी थी। परन्तु कोपोला एक शातिर निर्देशक थे, उन्होंने चतुराई से उस शब्द को स्क्रिप्ट से हटा दिया, पर कहानी में कोई बदलाव नहीं किया। इतना ही नहीं, उन्होंने लोकल गैंगस्टर्स से शूटिंग में सहयोग ली। गैंगस्टर्स ने इस फिल्म के लिए लोकेशन्स, सिक्योरिटी, सब कुछ मुहैया कराया।

 

फिल्म का म्यूजिक

फिल्म का म्यूजिक — “द गॉडफ़ादर थीम” को नीनो रोटा ने कंपोज किया था। यह एक ऐसा ट्यून है जो आज भी लोगों को सिनेमा की सबसे गहरी भावनाओं की याद दिलाता है।

फिल्म जब रिलीज हुई तो इसे देखने के लिए लंबी कतारें लगीं। ये उस जमाने की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक बनी। आलोचकों और दर्शकों दोनों ने इसे सिर आंखों पर बिठा लिया। ऑस्कर अवॉर्ड्स में भी इसने इतिहास रचा। ब्रैंडो ने बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जीता, परन्तु उन्होंने उसे ठुकरा दिया। उन्होंने एक नॉटिव अमेरिकन ऐक्टिविस्ट को स्टेज पर भेजा और हॉलीवुड में इंडियन कम्युनिटी के साथ हो रहे भेदभाव का मुद्दा उठाया।

अल पचीनो ने बाद में बताया कि जब वो फिल्म कर रहे थे, उन्हें यकीन नहीं था कि ये इतनी बड़ी फिल्म बनेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें पहले तो अपनी परफॉर्मेंस बिल्कुल पसंद ही नहीं आई थी। पर जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती गई, उन्होंने महसूस किया कि माइकल कोर्लियोन के किरदार में छुपी गहराई कितनी खास है।

 

 

​⭐ समीक्षक का निर्णय (Verdict) और रेटिंग

 

​समीक्षक का निर्णय: 

​”द गॉडफादर” को हॉलीवुड सिनेमा के इतिहास में केवल एक फिल्म के रूप में नहीं, बल्कि एक साहित्यिक कृति के रूप में देखा जाना चाहिए। निर्देशक फ्रांसिस फोर्ड कॉपोला ने जिस तरह से परिवार, सत्ता और नैतिकता के जटिल विषयों को माफिया के ताने-बाने में बुना है, वह आज भी दर्शकों को झकझोर देता है।

​मार्लन ब्रैंडो की डॉन कॉर्लियोन के रूप में अविस्मरणीय भूमिका और एक युवा अल पचिनो का माइकल कॉर्लियोन के रूप में धीमी गति से निर्दयी माफिया बॉस में बदलना, अभिनय की पाठशाला है। यह फिल्म सिर्फ़ एक अपराध कहानी नहीं है, बल्कि अश्विनी राय अरुण की नजर में यह दर्शाती है कि सत्ता व्यक्ति को कैसे बदलती है और परिवार के नाम पर क्या-क्या जायज ठहराया जाता है।

​यह हर फिल्म प्रेमी के लिए देखना अनिवार्य है, खासकर उन लोगों के लिए जो क्लासिक फिल्म समीक्षा के शौकीन हैं।

 

🌟 रेटिंग: 

कहानी और पटकथा:  ५/५

निर्देशन: ५/५

अभिनय: ५/५

सिनेमैटोग्राफी और संगीत: ५/५

कुल रेटिंग: ५/५

 

अपनी बात :

द गॉडफ़ादर सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह एक लेजेंड है। इसकी वजह से आज भी कई फिल्ममेकर्स प्रेरणा लेते हैं। इस फिल्म में एक डायलॉग् है, “I’m gonna make him an offer he can’t refuse” जो अब सिर्फ लाइन नहीं, सिनेमा की भाषा बन चुकी है। इसे 5/5 स्टार देना सिनेमा के प्रति एक विनम्र श्रद्धांजलि है।

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