शादी की दावत सजी थी, मेहमान अभी स्टार्टर पर टूटे ही थे कि इधर मेन कोर्स की टेबल पर पकवानों का ‘कपिल शर्मा शो’ शुरू हो गया।
सबसे पहले गरमा-गरम पूड़ी ने तेल में गोता लगाकर बाहर आते ही अपना सीना ५६ इंच का कर लिया। बगल में रखे आलू को कोहनी मारते हुए बोली, “देख रहे हो जलवा? हलवाई ने मुझे सबसे ज़्यादा फुलाया है। मेहमान तो मुझे देखते ही फिदा हो जाएंगे!”
आलू ने अपना मसाला झाड़ा और चिढ़कर बोला, “ज़्यादा मत फूल बहन! दो मिनट बाद जब तेरी हवा निकलेगी, तब कोई नहीं पूछेगा। बिना मेरे रसे के तो तू गले से भी नीचे नहीं उतरेगी।”
अभी आलू अपनी शेखी बघार ही रहा था कि बीच में मटर ने सिर उठाया और शरारती लहजे में बोला, “अरे-अरे आलू भाई! थोड़ा संभल के अंगड़ाई लो। बातों-बातों में तो मुझे अपनी ग्रेवी से पहले ही बाहर कर चुके हो, कहीं जोश-जोश में प्लेट से भी बाहर न गिरा देना! मैं छोटा हूँ तो क्या हुआ, पनीर के साथ मेरी सेटिंग तुमसे ज़्यादा तगड़ी है।”
यह सुनते ही शाही पनीर इठलाई, “मेरी बात तो करो ही मत! मैं इस टेबल की ‘सेलिब्रिटी’ हूँ। लोग मेरी ही फोटो खींचकर इंस्टाग्राम पर डालेंगे।” पास ही खड़ा चना मसाला अपनी तीखी महक बिखेरते हुए गरजा, “सेलिब्रिटी होगी अपने घर की! असली ‘प्रोटीन’ का पावर तो मेरे पास है। एक चम्मच मुझे खाकर देखो, पनीर का मखमल भूल जाओगे।”
तभी पुलाव के लंबे बासमती चावलों ने अपनी केसरिया खुश्बू की चादर फैलाई और बड़े ही नज़ाकत से बोले, “शोर बंद करो! तुम सब तो बस साइड रोल हो। महफ़िल की असली ‘एंट्री’ तो मेरे साथ होती है। मेरी खुशबू ही मेहमानों को खींचकर इस मेज़ तक लाती है।”
इस पर तड़का दाल ने हींग का ऐसा बम फोड़ा कि सबकी बोलती बंद हो गई। दाल बोली, “दिखावे में क्या रखा है? असली ‘पेट की शांति’ तो मेरे पास है।” पास खड़ी चटाखेदार चटनी ने तपाक से कहा, “शांति चाहिए तो हिमालय जाओ, यहाँ तो सबको चटाखा चाहिए जो सिर्फ मैं ही दे सकती हूँ!”
कोने में खड़ी इमरती अपनी गोलाई दिखाते हुए जलेबी से बोली, “देख रही हो बहन, ये फीकी दाल भी बातें कर रही है!” जलेबी खनककर बोली, “कहने दो! ये सब चाहे जितना नमक-मिर्च कर लें, अंत में लोग हमारी चाशनी में ही डूबेंगे।”
तभी रबड़ी ने मलाई की परतें जमाते हुए गहरी आवाज़ में कहा, “सब्र करो! जब तक मैं जलेबी और गुलाब जामुन के ऊपर नहीं बैठूँगी, तब तक किसी को ‘परम आनंद’ नहीं मिलेगा। असली ‘क्लाइमेक्स’ तो मैं ही हूँ!”
अंत में, चाशनी में डूबे गुलाब जामुन ने सबको चुप कराते हुए कहा, “लड़ो मत! आखिर में बिल तो हमारी मिठास के नाम पर ही फटेगा। लोग उंगलियां तो हमें खाने के बाद ही चाटेंगे!”
तभी एक छोटा बच्चा वहां आया और बोला, “वाह! मम्मी देखो, रसगुल्ले कितने बड़े हैं!” बस फिर क्या था, सारे पकवान अपनी एक्टिंग सुधारकर सीधे बैठ गए और दावत की खुशियों में घुल गए।