images (44)

महाप्रसादजननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी: तुलसी पूजन दिवस पर विशेष सांस्कृतिक लेख

 

​महाप्रसादजननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी।

आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

​तुलसी पूजन दिवस: दिनांक — २५ दिसम्बर

​भारतीय संस्कृति में पूजनीय वृक्षों और वनस्पतियों में माँ तुलसी का स्थान सर्वोपरि और अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। सनातन परंपरा के अनुसार, तुलसी जी का केवल पूजन ही नहीं, बल्कि उनके दर्शन, सेवन और रोपण से भी आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक—तीनों प्रकार के दैहिक और मानसिक तापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

​तुलसी की महिमा को स्वयं देवाधिदेव महादेव ने भी रेखांकित किया है। भगवान शिव कहते हैं— “तुलसी समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं।”

 

​पौराणिक काल में तुलसी रोपण और मानस पूजन के साक्ष्य

​शास्त्रों और पुराणों में ऐसे अनेक प्रसंग मिलते हैं जहाँ स्वयं ईश्वर के विभिन्न अवतारों और शक्तियों ने लोक-कल्याण के लिए तुलसी जी की शरण ली:

प्रभु श्री राम का अनुष्ठान: अपने हित साधन की इच्छा से दंडकारण्य के पावन क्षेत्र में, तथा दुष्ट राक्षसों का वध करने के महान उद्देश्य से सरयू तट पर भगवान श्री रामचंद्र जी ने स्वयं अपने हाथों से तुलसी का रोपण किया था।

​योगेश्वर श्रीकृष्ण का वात्सल्य: गोमती के पावन तट पर तथा दिव्य भूमि वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने तुलसी की स्थापना की, जो आज भी ‘वृंदा’ के रूप में वहां साक्षात् वास करती हैं।

माता सीता का अनन्य ध्यान: लंका की अशोक वाटिका में रावण के कड़े पहरे के बीच, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी की पुनः प्राप्ति और उनकी कुशलता के लिए जगज्जननी माता सीता जी ने तुलसी जी का ही मानस पूजन और एकाग्र ध्यान किया था।

माता पार्वती की तपस्या: देवों के देव महादेव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए, आद्यशक्ति माता पार्वती जी ने हिमालय पर्वत की कंदराओं में कठोर तप के साथ तुलसी का वृक्ष लगाया था और उसकी सेवा की थी।

 

​श्रीहरि की प्रिय और ऋषियों का आधार

​सनातन धर्म की पूजा पद्धतियों में यह विधान सर्वविदित है कि जगत के पालनहार भगवान विष्णु की कोई भी पूजा, आराधना या नैवेद्य तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक उसमें तुलसी दल (पत्ता) अर्पित न किया जाए। हमारे दिव्यद्रष्टा ऋषि-मुनि इस रहस्य को भली-भांति जानते थे; इसीलिए वे अपने आश्रमों के आसपास अनिवार्य रूप से तुलसी का पौधा लगाते थे और नित्य तुलसीयुक्त जल का आचमन लेकर स्वयं को आंतरिक रूप से पवित्र और निरोगी रखते थे।

​’पद्म पुराण’ में तुलसी जी की अलौकिक महिमा का वर्णन करते हुए अत्यंत सुंदर बात कही गई है:

​”जिनके केवल दर्शन मात्र से ही मनुष्यों को करोड़ों गोदान का अक्षय पुण्य फल प्राप्त होता है, उन कल्याणमयी माँ तुलसी का पूजन और वंदन भला कौन विवेकशील मनुष्य नहीं करना चाहेगा!”

​आइए, इस २५ दिसंबर को हम सभी अपने-अपने घरों में तुलसी जी का दीपदान और पूजन कर इस पावन ‘तुलसी पूजन दिवस’ को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाएं और अपनी आने वाली पीढ़ी को इस अनमोल विरासत से परिचित कराएं।

​धन्यवाद !

 

 

 

हिन्दी दिवस पर विशेष…

 

 

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *