images (11)

मिट्टी और कंक्रीट के फकीर कलशिल्पी: रामकिंकर बैज और उनकी कला का जीवंत संसार

 

​”कला जब महलों की चकाचौंध और बंद कमरों से निकलकर खुले आसमान के नीचे आम जनमानस से हाथ मिलाती है, तो वह ‘रामकिंकर बैज’ बन जाती है। कंक्रीट और सीमेंट में प्राण फूँकने वाले किंकर दा भारतीय आधुनिक मूर्तिकला के वो अप्रतिम स्तंभ हैं, जिन्होंने अभावों को ही अपना वैभव बना लिया।”

​भारतीय आधुनिक कला के इतिहास में कुछ ऐसे विरले साधक हुए हैं, जिन्होंने कला की रीतियों को केवल अपनाया नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर नए प्रतिमान गढ़े। ऐसे ही एक युगांतरकारी आधुनिक कलाकार और मूर्तिकार थे—रामकिंकर बैज जी। उनका जन्म २० मई १९०६ को पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र बाँकुड़ा में हुआ था। एक अत्यधिक आर्थिक और सामाजिक रूप से विपन्न परिवार में जनमे रामकिंकर जी ने अपनी कंगाली को कभी अपनी कला के आड़े नहीं आने दिया। अपने दृढ़ संकल्प, अद्भुत जिजीविषा और नैसर्गिक प्रतिभा के बल पर वे भारतीय कला जगत के सबसे प्रतिष्ठित प्रारंभिक आधुनिक कलाकारों में से एक बने।

 

छह दशकों की कला-यात्रा और सार्वजनिक कला के नए प्रतिमान

​भारतीय कला में उनके इसी अतुलनीय और अप्रतिम योगदान के लिए वर्ष १९७० में भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पदम भूषण’ से अलंकृत किया था। रामकिंकर जी की स्मारकीय शिल्पकृतियों (Monumental Sculptures) ने, विशेष रूप से शांतिनिकेतन के खुले प्रांगण में स्थापित उनकी मूर्तियों ने, सार्वजनिक कला (Public Art) में एक नया और अनूठा प्रतिमान स्थापित किया। उनके शिल्प में संथाल आदिवासियों का श्रम, प्रकृति का उल्लास और जीवन का यथार्थ झलकता है।

​हाल ही में राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (NGMA) द्वारा आयोजित एक भव्य ‘सिंहावलोकन प्रदर्शनी’ में उनकी छह दशकों की अनवरत कला यात्रा को समेटा गया। इस प्रदर्शनी में उनके द्वारा रचित लगभग ३५० महत्वपूर्ण चित्रकृतियों (Paintings), अमूल्य रेखाचित्रों (Sketches), ग्राफिक्स और अद्वितीय मूर्तियों के संग्रह को शामिल किया गया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी के प्रसिद्ध क्यूरेटर श्री के. एस. राधाकृष्णन ने किंकर दा के विन्यास को स्पष्ट करते हुए कहा:

​‘मेरी इस प्रदर्शनी का उद्देश्य रामकिंकर बैज के जीवन के उन अनमोल क्षणों को प्रस्तुत करना है, जिसमें उन्होंने उनसे पहले काम करने वाले (पूर्ववर्तियों), उनके साथ काम करने वाले (समकालीनों) और उनके बाद काम करने वाली भावी पीढ़ियों के साथ एक अद्भुत सामंजस्य स्थापित किया था।’

 

​कला जगत के अमूल्य प्रकाशन: इतिहास को सहेजने की कोशिश

​इस विशेष सिंहावलोकन प्रदर्शनी के पावन अवसर पर राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (NGMA) ने कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और शोधपरक प्रकाशनों को कला प्रेमियों के सम्मुख प्रस्तुत किया है। ये पुस्तकें रामकिंकर जी के जीवन को और करीब से समझने का जरिया हैं:

​‘रामकिंकर बैज’: दिल्ली आर्ट गैलरी (DAG) के गठजोड़ के साथ प्रस्तुत, प्रो. आर. सिवा कुमार द्वारा रचित एक विस्तृत ग्रंथ।

​‘माई डेज़ विथ रामकिंकर’: नियोगी बुक्स के सहयोग से प्रकाशित, मूल रूप से श्री सोमेंद्रनाथ बंद्योपाध्याय द्वारा रचित और सुश्री भास्वती घोष द्वारा अनुदित एक संस्मरणात्मक कृति।

‘रामकिंकर्स यक्ष यक्षी’: मुसुई आर्ट फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत और ‘आकार प्रकार’ तथा ‘नव्या गैलरी’ द्वारा समर्थित, स्वयं क्यूरेटर श्री के. एस. राधाकृष्णन की एक बेहतरीन पुस्तक।

​‘रामकिंकर: स्ट्रेट फ्रॉम माई हार्ट’: मुसुई आर्ट फाउंडेशन द्वारा ही प्रस्तुत और प्रख्यात कला समीक्षक श्री जॉनी एम. एल. द्वारा रचित एक भावपूर्ण विमर्श।

 

एक फकीर और घुमक्कड़ का विराट कलाकार वजूद

​रामकिंकर बैज का व्यक्तित्व किसी संन्यासी से कम नहीं था। वे कला के मतवाले थे, जिन्हें न धन का लोभ था और न ही नाम की भूख। राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय के तत्कालीन निदेशक प्रो. राजीव लोचन ने उनके व्यक्तित्व को नमन करते हुए बिल्कुल सटीक कहा था:

​”यह प्रदर्शनी उस महान और सृजनात्मक व्यक्तित्व के जीवन को आलोकित करती है जो स्वभाव से एक फकीर और घुमक्कड़ प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उन्होंने किसी रूढ़िवादी विधा में बंधने के बजाय, अपने काम के ज़रिए जीवन से भी विशाल कलाकार व्यक्तित्व और अपनी असीमित सृजनात्मक प्रतिभा को परदे और पत्थरों पर प्रतिबिंबित किया है।”

 

निष्कर्ष: आधुनिक कला के मसीहा को वंदन

​कंक्रीट, रोड़ी, सीमेंट और मिट्टी जैसे सीधे-सादे माध्यमों से ‘संथाल परिवार’ और ‘यक्ष-यक्षी’ जैसी कालजयी आकृतियाँ गढ़ने वाले रामकिंकर बैज आज भी कला के हर नए अध्येता की प्रेरणा हैं। लेखक विद्यावाचस्पति अश्विनी राय ‘अरुण’ भारतीय आधुनिक मूर्तिकला के इस अनन्य मसीहा, फकीर शिल्पी और माँ भारती के गौरवशाली पुत्र की पावन स्मृतियों को सादर नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

​धन्यवाद!

 

 

शरद जोशी की जीवनी: ‘पानी की समस्या’ व्यंग्य और सत्ता को चुनौती देने वाले अमर लेखक

 

 

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *