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ज्ञानवापी का व्यासजी तहखाना: 31 साल बाद फिर गूँजी आरती, जानिए क्या है इसका ऐतिहासिक और कानूनी सफर

काशी के ज्ञानवापी परिसर में स्थित ‘व्यासजी का तहखाना’ इन दिनों देश भर में चर्चा का केंद्र है। 31 जनवरी, 2024 को वाराणसी जिला कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद, यहाँ 31 वर्षों का लंबा इंतज़ार खत्म हुआ और पुनः पूजा-अर्चना शुरू हुई। आइए विस्तार से जानते हैं इस तहखाने का इतिहास, 1993 की पाबंदी और वर्तमान अदालती आदेश की पूरी कहानी।

1. व्यासजी के तहखाने का स्थान और महत्व

ज्ञानवापी परिसर के दक्षिण की ओर स्थित यह तहखाना हिंदू पक्ष के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 * स्थान: यह नंदी भगवान की प्रतिमा के ठीक सामने स्थित है।

 * परंपरा: पिछले 400 वर्षों से व्यास परिवार यहाँ शैव परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ करता आ रहा है। ब्रिटिश काल के दौरान भी अदालती फैसलों में इस स्थान पर व्यास परिवार का कब्जा बरकरार रहा था।

 * साक्ष्य: तहखाने के खंभों पर प्राचीन हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीक जैसे स्वास्तिक, कमल और ‘ॐ’ की आकृतियां मौजूद हैं।

 

2. 1993 में पूजा पर रोक: कब और क्यों?

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के बाद उत्तर प्रदेश का माहौल तनावपूर्ण था।

 * मुलायम सिंह सरकार का निर्णय: वर्ष 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द का हवाला देते हुए ज्ञानवापी परिसर में बैरिकेडिंग कर दी गई।

 * अचानक लगी पाबंदी: पहले बांस-बल्लियों से और बाद में पक्की बैरिकेडिंग कर व्यासजी के तहखाने का रास्ता बंद कर दिया गया। बिना किसी लिखित आदेश के यहाँ सदियों से चली आ रही तीन समय की पूजा (आरती और भोग) को अचानक रोक दिया गया।

3. व्यास परिवार की यादें और एएसआई (ASI) सर्वे

व्यास परिवार के सदस्य आशुतोष व्यास के अनुसार, ज्ञानवापी के भीतर कुल 10 तहखाने हैं, जिनमें से दो को खोला गया है।

 * अंदर का दृश्य: तहखाने के अंदर भगवान शिव के कई शिवलिंग, प्राचीन नंदी की मूर्तियाँ और खंडित अवशेष मौजूद हैं।

 * ASI रिपोर्ट: हाल ही में हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) में भी इस बात की पुष्टि हुई कि तहखाने के भीतर मंदिर होने के पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं।

4. कानूनी लड़ाई और कोर्ट का फैसला

पूजा का अधिकार वापस पाने के लिए व्यास परिवार ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी:

 * सितंबर 2023: शैलेंद्र पाठक (व्यास परिवार के सदस्य) ने कोर्ट में याचिका दायर कर पूजा फिर से शुरू करने की अनुमति मांगी।

 * 17 जनवरी 2024: कोर्ट ने जिलाधिकारी (DM) को इस तहखाने का रिसीवर नियुक्त किया।

 * 31 जनवरी 2024: जिला कोर्ट के जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना की अनुमति दी।

5. 31 साल बाद दीपावली जैसा उल्लास

कोर्ट के आदेश के महज 11 घंटे के भीतर प्रशासन ने व्यवस्था की और रात लगभग 2:30 बजे तहखाने में शयन आरती हुई। 31 साल के अंधेरे के बाद पहली बार वहां दीप जलाए गए। 1 फरवरी से यहाँ नियमित रूप से तीनों समय की आरती और भोग की प्रक्रिया बहाल कर दी गई है।

निष्कर्ष

व्यासजी का तहखाना केवल एक कमरा नहीं, बल्कि काशी की प्राचीन संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। कोर्ट के इस फैसले को हिंदू पक्ष अपनी एक बड़ी कानूनी जीत मान रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। फिलहाल, काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के पुजारी यहाँ नियमित पूजा संपन्न करा रहे हैं।

 

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