cropped-icon-shoot2pen-2

विश्व कविता दिवस: हृदय की अनुभूतियों का भाषाई उत्सव

 

​कहते हैं कि जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि। कविता केवल शब्दों का चयन नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक भावनाओं, संघर्षों और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सबसे सुसंस्कृत माध्यम है। यह वह संगीत है जिसे सुनने के लिए कान नहीं, बल्कि हृदय की आवश्यकता होती है।

 

​ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और यूनेस्को का संकल्प

​प्रतिवर्ष २१ मार्च को संपूर्ण विश्व में ‘विश्व कविता दिवस’ मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष १९९९ में पेरिस में आयोजित यूनेस्को के ३०वें आम सम्मेलन के दौरान हुई थी। यूनेस्को का मुख्य उद्देश्य काव्य अभिव्यक्ति के माध्यम से भाषाई विविधता का समर्थन करना और उन भाषाओं को नया जीवन देना था जो धीरे-धीरे लुप्तप्राय होती जा रही हैं।

 

​यूनेस्को की मूल घोषणा के अनुसार, इस दिवस का लक्ष्य:

​पूरे विश्व में कविता के पठन, लेखन, प्रकाशन और शिक्षण को प्रोत्साहित करना है।

​राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कविता आंदोलनों को एक नई पहचान और ऊर्जा देना है।

​कविता को अन्य कलाओं, जैसे रंगमंच, संगीत और चित्रकला के साथ जोड़कर समाज में रचनात्मकता को बढ़ावा देना है।

 

​अतीत की यादें: १५ अक्टूबर का महत्व

​विश्व कविता दिवस मनाए जाने की परंपरा नई नहीं है। यूनेस्को की घोषणा से पहले, विश्व भर में यह दिवस १५ अक्टूबर को मनाया जाता था। यह तिथि महान रोमन कवि वर्जिल (Virgil) का जन्मदिवस है। वर्जिल के अनुसार, “कविता शब्दों की वह व्याख्या है, जो सीधे हृदय की गहराई से आती है।” आज भी कई देशों में अक्टूबर के महीने में कविता के प्रति विशेष अनुराग व्यक्त किया जाता है।

 

​कविता: समाज का दर्पण और मार्गदर्शक

​कविता केवल कल्पनाओं का लोक नहीं है, बल्कि यह लुप्तप्राय होती संस्कृतियों की आवाज़ है। जब शब्द हार जाते हैं, तब एक छोटी सी कविता समाज में क्रांति ला देती है या किसी टूटते हुए मन को सहारा देती है। २१ मार्च का यह दिन हमें याद दिलाता है कि तकनीक के इस युग में भी मानवीय भावनाओं की कोमलता और ‘शब्दों का जादू’ बरकरार है।

 

​अश्विनी राय ‘अरुण’ की भावांजलि

​”कविता वह सेतु है जो इंसान को इंसान से और आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है। २१ मार्च को मनाए जाने वाले इस वैश्विक पर्व पर मैं विश्व भर के उन सभी शब्द-साधकों को नमन करता हूँ, जो अपनी लेखनी से समाज में प्रेम और करुणा की धारा प्रवाहित कर रहे हैं।”

 

 

About The Author

1 thought on “विश्व कविता दिवस: अर्थ, इतिहास और साहित्य में इसका महत्व | अश्विनी राय ‘अरुण’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *