प्रिय स्वयं को प्रिय के लिए संवारता है...
पुस्तक
अलविदा कह कर क्या चले जाते हैं लोग?...
कुछ वक्त जिन्दगी के, मैने जिंदगी से चुरा लिए।...
चलिए एक बार फिर से चलते हैं, बचपन...
ये मिट्टी है, हाँ जी ये मिट्टी है।...
भूख तो मौत से भी बड़ी होती है,...
देखने, जानने अथवा सुनने में श्रद्धा और भक्ति समान...
लबों पर हर बार खामोशी झूलती है, लेकिन हर...