April 5, 2025

भारत चीन युद्ध १९६२ की बात है..दोनो तरफ से ठन चुकी थी, मगर भारतीय अर्थव्यवस्था इस युद्ध के खर्च को सम्हालने की अवस्था में नहीं थी। चारों तरफ उदासीनता फैली थी और इससे राजनीतिक गलियारा भी अछूता नहीं था। सच कहें तो यही सबसे जादा परेशान था, क्योंकि प्रजा से ज्यादा जिम्मेदारी राजा की ही होती है। मीटिंग दर मीटिंग होते गए, मगर रिजल्ट वही ढाक के तीन पात।

२० अक्टूबर १९६२ के दिन युद्ध शुरू हो गया, भारत सरकार अपना पूरा खजाना खाली कर चुकी थी…अब आगे युद्ध करने की अवस्था नहीं थी, इस बीच २० नवम्बर १९६२ को चीन ने युद्ध विराम की घोषणा कर दी। इस युद्ध से जहां भारत का काफी नुकसान हो चुका था वहीं एक अलग ही लड़ाई देश मे शुरू हो चुकी थी, देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ने लगी थी, भुखमरी की अवस्था आन पड़ी थी।

युद्ध के दौरान ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री यशवंतराव चव्हाण को भारत का रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया, जिससे महाराष्ट्र की कुर्सी खाली हो गई।

यही वह वक्त था जब…
चन्द्रपूर जिले के साओली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से आने वाले…

श्री मारोतराव कन्नमवार
को २० नवंबर १९६२ के दिन महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाया गया।

श्री कन्नमवार ने पूरे राज्य में घूम घूम कर जनता से मदद की गुहार लगाई, उनके एक बोली पर चंद्रपुर जिले की जनता ने मदद के नाम पर अपने अपने घर को सोने, चांदी, गहनों से खाली कर दिया। इसका प्रभाव पूरे राज्य पर पड़ा राज्य से सोने का अंबार लग गया। मगर मुख्यमंत्री बनने के मात्र एक साल के बाद १९६३ में कन्नमवार जी दुनिया छोड़ गए। इनके किए काम को १९६५ में लाल बहादुर शास्त्री जी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पूरे भारत में बढ़ाया।

यही वह समय था जब देश अपने आप को सम्हाल सका मगर अफसोस कन्नमवार जी के किए काम को ना तो कभी कोई राजनीतिक अखाड़ा चर्चा में लता है ना ही देश और ना ही हम।

१० जनवरी १९०० को जन्में श्री कन्नमवार जी का ऐसा प्रभाव था अपनी जनता पर और प्रभाव ऐसे ही नहीं बनता किसी का किसी पर।

नमन महात्मन!
कोटि कोटि नमन! वंदन !

धन्यवाद !

Ashwini Rai

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