Month: August 2026

मुक्तिबोध की कविता ‘अंधेरे में’: आत्म-खोज का काव्य या बौद्धिक अराजकता और कुंठा का...
फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ का ‘मैला आँचल’: लोक-संस्कृति की सोंधी महक या सनातन संस्थाओं पर...
यशपाल का ‘झूठा सच’: विभाजन की प्रामाणिक त्रासदी या ऐतिहासिक तथ्यों की वामपंथी लीपापोती?...
यशपाल का उपन्यास ‘दिव्या’: स्त्री-मुक्ति का आवरण या सनातन परंपरा पर योजनाबद्ध आघात?  ...
प्रेमचंद की कहानी ‘कफ़न’: सामाजिक यथार्थ या मानवीय संवेदनाओं का आपराधिक विकृतीकरण?   ​’कफ़न’...
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’: साहित्यिक सौंदर्य या सामाजिक विद्वेष का प्रायोजित...
मुंशी प्रेमचंद का ‘गोदान’: कृषक जीवन का महाकाव्य या सामाजिक विद्वेष की सुनियोजित पटकथा?...
फ़िल्म समीक्षा: ‘दिल की रानी’ (१९४७) — स्वाभिमान, कला-साधना और हल्की-फुल्की हास्य-रोमांस गाथा  ...